कहा कि जो लोग २० सालसे ज्यादा अरसेसे इस व्यापारमें लगे हुए हैं अब उनके लिए इस व्यवसायको छोड़ना कैसे सम्भव होगा? मेरी समझमें शान्त चित्तसे उन्हें परिस्थितिपर विचार करना चाहिए और इसके बारेमें कोई निश्चित निर्णय कर लेना चाहिए। मैंने इस समस्यापर विचार किया है और मैं यह अनुभव करता हूँ कि चूँकि आप लोग गरीब नहीं हैं, इसलिए आप कोई दूसरा धन्धा, जिसे आप पसन्द करें, आसानीसे आरम्भ कर सकते हैं। मैं आपसे प्रार्थना करता हूँ कि आप अपनी एक समिति बना लें और तब यह विचार करें कि आपको इस मामलेमें क्या करना चाहिए। किन्तु आपको आशा तो कदापि नहीं छोड़नी चाहिए। आप दूसरे धन्धे और दूसरे काम कर सकते हैं और यह प्रयत्न करके देख सकते हैं कि क्या आप उनके द्वारा भी शराबके व्यापारकी तरह आसानीसे धनवान नहीं हो सकते। लेकिन सबसे पहले तो आपका कर्त्तव्य यही है कि आप शराबका व्यापार इसी दम छोड़ दें। जबतक आप अपने देशके निमित्त कुछ त्याग करनेके लिए तैयार नहीं होंगे तबतक आप स्वतन्त्रताकी रक्षा नहीं कर सकेंगे और न स्वराज्य ही ले सकेंगे। केवल त्यागके द्वारा ही हम स्वराज्य और पूर्ण स्वतन्त्रताके योग्य हो सकते हैं। आपको अपनी ही योग्यतापर निर्भर रहना चाहिए और अपने ऊपर भरोसा रखना चाहिए। अंग्रेज जातिने भी आत्मविश्वासके कारण ही सबसे अधिक उन्नति की है। मेरा आपसे अनुरोध है कि आप आशा न छोड़ें और अपने ऊपर भरोसा रखें, आपसे जितने त्यागकी अपेक्षा की जाती है उसके लिए परमात्मा आपको बुद्धि देगा।
श्री गांधीने इसके बाद कहा कि यदि व्यापारी मुझसे कोई प्रश्न पूछेंगे तो मैं उनका उत्तर देने को तैयार हूँ।
बॉम्बे क्रॉनिकल, १३-७-१९२१
१७५. टिप्पणियाँ
सीमा-प्रान्तके मित्र
मैंने सीमा-प्रान्तके मित्रोंसे जो अपील की है उसके बारेमें बन्नूके मुहम्मद नवाज़खाँ साहब, बी॰ ए॰, एलएल॰ बी॰ ने मुझे एक लम्बा पत्र भेजा है। 'यंग इंडिया' में उसे उद्धृत करना सम्भव नहीं है; इसलिए मैं उसका सारांश यहाँ दे रहा हूँ। उनका विचार है कि जो कबायली सन्देशको समझ जायेंगे वे प्रसन्नतापूर्वक इसे स्वीकार करेंगे। उन्होंने कबायलियोंकी भूमि हथियाये जानेका इतिहास बतलाते हुए यह सिद्ध किया है कि इस भूमिके हथियाये जानेसे पहले हमले बिलकुल नहीं होते थे। और चूँकि सभीके पास हथियार होते थे, इसलिए जिनपर हमला होता था वे अपनी रक्षा कर सकते थे। किन्तु इस इलाकेके हड़प कर लिये जानेके बाद जिन कबायलियोंकी भूमि उनसे जबरदस्ती छीन ली गई थी वे हथियाये गये इलाके के हिन्दू और मुसलमान