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पृष्ठ:सम्पूर्ण गाँधी वांग्मय Sampurna Gandhi, vol. 20.pdf/४१४

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३८२ सम्पूर्ण गांधी वाङ्मय रहा हो तब विदेशी निर्माताओं तथा भारतीय आयातकोंके हितोंपर विचार नहीं किया जा सकता । आप इसे विदेशी मालका आम बहिष्कार करनेवाला आन्दोलन न समझें। भारत अन्तर्राष्ट्रीय व्यापारसे अपनेको अलग नहीं रखना चाहता। कपड़े के अलावा जो वस्तुएँ भारत के बाहर अधिक अच्छी बन सकती हैं उन्हें वह व्यापार-सन्धि करनेवाले दोनों पक्षोंके लिए सुविधाजनक शर्तोंपर कृतज्ञताके साथ ग्रहण करेगा । भारतपर जबरदस्ती कुछ भी नहीं लादा जा सकता । किन्तु मैं भविष्य की ओर नहीं झाँकना चाहता। मैं निश्चित रूपसे आशा करता हूँ कि जल्दी ही भारत के लिए बराबरीकी शर्तोंपर इंग्लैंड- के साथ सहयोग करना सम्भव हो जायेगा । तब व्यापारिक सम्बन्धोंकी जाँच करनेका अवसर मिलेगा। इस समय तो मैं आपसे कहूँगा कि आप विदेशी कपड़ोंके बहिष्कारको पूरा करनेमें हमारे सहायक बनें । उसी तरहका और उतना ही महत्त्वपूर्ण आन्दोलन शराबबन्दी है । शराबकी दुकानें समाजपर लादा गया घोर अभिशाप है । इस प्रश्नके सम्बन्धमें आज जैसी चेतना लोगों में पहले कभी नहीं थी । मैं स्वीकार करता हूँ कि इस सम्बन्धमें आपकी अपेक्षा भारतीय मन्त्री ज्यादा सहायता कर सकते हैं। लेकिन मैं चाहूँगा कि आप इस प्रश्न- पर अपने विचार स्पष्ट रूपसे व्यक्त करें । जहाँतक मैं समझता हूँ पूर्ण मद्य निषेध किसी प्रकार के प्रशासनके अन्तर्गत तो राष्ट्रके आग्रहपर ही किया जा सकता है । आप राष्ट्रके पक्षमें अपना प्रभाव डालकर निरन्तर बढ़ते हुए आन्दोलनकी प्रगतिमें सहायता पहुँचा सकते हैं । आपका विश्वस्त मित्र, मो० क० गांधी [ अंग्रेजीसे ] यंग इंडिया, १३-७-१९२१ १७८. श्रद्धाका स्वरूप मुझे एक अजीब-सा गुमनाम पत्र मिला है। जिसमें इस बात के लिए मेरी प्रशंसा की गई है कि मैंने वह लक्ष्य हाथमें लिया है जिससे लोकमान्यको सबसे अधिक प्रेम था और मुझसे कहा गया है कि लोकमान्यकी आत्मा मेरे अन्दर निवास कर रही है। और मुझे अपनेको उनका एक योग्य अनुगामी सिद्ध करना चाहिए। पत्रमें आगे कहा गया है कि स्वराज्य के संघर्ष में हिम्मत न हारूँ ? और अन्तमें मुझपर आरोप लगाया गया है कि अपनेको राजनीतिक रूपसे गोखलेका शिष्य बताकर मैं लोगोंको धोखा देता हूँ। मैं चाहता हूँ लोग गुलामोंकी तरह नाम छिपाकर पत्र लिखनेकी प्रवृत्ति छोड़ दें। हम लोग अपने अन्दर स्वराज्यकी भावना बढ़ा रहे हैं, इसलिए हममें निर्भयतापूर्वक अपनी बात कहने का साहस होना चाहिए। चूँकि इस पत्रका विषय सार्वजनिक महत्त्वका Gandhi Heritage Portal