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पृष्ठ:सम्पूर्ण गाँधी वांग्मय Sampurna Gandhi, vol. 20.pdf/४१९

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पत्र: एक संवाददाताको ३८७ उनके उद्देश्यकी पवित्रता बढ़ जाती है। इस कारण सरकारी दमनसे भयभीत हुए बिना हमको अपने लक्ष्यकी ओर बढ़ते रहना चाहिए। मुझे यह भी मालूम हुआ है। कि स्थानीय दलबन्दी और झगड़ोंके कारण धारवाड़का मामला कुछ ज्यादा उलझ गया है । मेरा सभीसे यह अनुरोध है कि इस समय जो खतरा हम सबके सामने खड़ा है उसे ध्यान में रखते हुए हमें अपने आपसी मतभेदोंको भूल जाना चाहिए। मैं आशा करता हूँ कि यदि सब नहीं तो कमसे कम असहयोगी अवश्य ऐसा करेंगे । आपसके लोग यदि कुछ ज्यादती भी करें तो उसकी परवाह न की जाये, तो विरोधियोंका वैमनस्य स्वतः शान्त हो जायेगा । 'विरोधको दूर करनेका प्रेम और औदार्यसे बढ़कर अन्य कोई उपाय नहीं है' । [ अंग्रेजीसे ] बॉम्बे क्रॉनिकल, १४-७-१९२१ १८१. पत्र : एक संवाददाताको' लैबर्नम रोड बम्बई १४ जुलाई, १९२१ प्रिय महोदय, आपने जो कुछ पूछा है उसके सम्बन्धमें मेरा उत्तर यह है कि यदि कोई सनातनी हिन्दू कुछ निश्चित स्थितियोंमें स्वच्छता के साथ पकाया गया विशुद्ध निरामिष भोजन किसी मुसलमान या किसी दूसरे व्यक्ति के साथ खाता है तो उसके लिए ऐसा करना अवैध नहीं है । मौलाना शौकत अलीने स्वर्गीय लोकमान्य तिलककी अर्थीको कन्धा देनेपर खेद प्रकट किया है इसके सम्बन्ध में मुझे यह कहना है कि उन्होंने स्वतः इस कार्यपर खेद प्रकट नहीं किया है, बल्कि एक हिन्दूकी अर्थीको कन्धा देकर उन्होंने इस्लामकी परम्पराका अनजानेमें जो भंग किया है, उसके लिए उपस्थित मौलानाओं से क्षमा मांगी है। उनकी यह क्षमा-याचना दिवंगत आत्माके प्रति उनके अक्षुण्ण आदरभाव से सर्वथा मेल खाती है । आपका सच्चा, अंग्रेजी पत्र (एस० एन० ७५७१ ) की फोटो - नकलसे । १. पत्र पानेवाले का नाम ज्ञात नहीं है । मो० क० गांधी Gandhi Heritage Portal