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पृष्ठ:सम्पूर्ण गाँधी वांग्मय Sampurna Gandhi, vol. 20.pdf/४२५

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भाषण : बम्बई में स्वदेशीपर ३९३ ही में लौटे दो भारतीय नवयुवक आये थे । उनमें एक बंगाली था और दूसरा पारसी । दोनों बड़े सच्चे दिलसे बातें कर रहे थे। मैंने उनके कई सवालोंके जवाब दिये और उनसे सिर्फ एक सवाल पूछा : क्या वे अपने विदेशी वस्त्र छोड़नेके लिए तैयार हैं ? उनकी बातों में कोई भी दुराव-छिपाव नहीं था और दोनों ही अपने देशसे प्रेम करते थे। दोनोंने स्वीकार किया कि विदेशी वस्त्रोंका त्याग ही उचित है। लेकिन उनमें से एकने कहा कि वह अपने-आपमें इतनी शक्ति महसूस नहीं करता कि विदेशी वस्त्र त्याग सके । पर इस बातको भी वह पूरी तरह मानता था कि यदि लोग विदेशी वस्त्रों तकका त्याग नहीं कर सकते, तो इसका मतलब होगा कि वे स्वराज्यके लिए तैयार नहीं हैं। मैंने स्वराज्य लेनेके लिए एक सालकी अवधि निश्चित की है। में उसका पूरा महत्त्व और उसका अर्थ समझता हूँ। मैंने उसके लिए कुछ निश्चित शर्ते रखी हैं। कांग्रेसने उनको अपने प्रस्ताव में शामिल कर लिया है। भारतकी बुराइयोंकी क्या दवा होनी चाहिए, इसे मैं उतनी ही अच्छी तरह जानता हूँ जितना कि एक डाक्टर अपने मरीजके रोगके बारेमें जानता है। लेकिन यदि मरीज डाक्टरकी बतलाई दवा न करे और इसलिए चंगा न हो पाये, तो उसमें डाक्टरका क्या दोष ? मैंने एक दवा बताई है, जिसे में समझता हूँ कि भारत बिना किसी ज्यादा कठिनाई के सेवन कर सकता है और उसे पचा सकता है। कांग्रेसने देशके सामने जो कार्यक्रम रखा है वह अपने आपमें सचमुच त्रुटि रहित है। उस कार्यक्रम में स्वदेशी भी शामिल है। स्वदेशीको आधे मनसे अपनाकर काम नहीं चलेगा, उसे पूरी तौरपर, हर क्षेत्रमें स्वीकार करना पड़ेगा । इस विषय में अपनी पूरी रजामंदी जाहिर करनेका शानदार मौका आपके सामने है। पहली अगस्त आ रही है। क्या हमने अपने-आपको इस योग्य बना लिया है कि हम लोकमान्यकी पुण्य तिथि मना सकें ? क्या हम इस योग्य बन पाये हैं कि लोक- मान्यके दिये हुए मन्त्रका उच्चार कर सकें? जिस तरह हर हिन्दूको गायत्री- पाठ करनेसे पहले आचमन आदि करके शुद्ध होना पड़ता है, और मुसलमानोंको नमाज पढ़ने से पहले वजू करनी पड़ती है, तभी उसमें असर पैदा होता है। इसी तरह श्री तिलक द्वारा दिये गये स्वराज्य मन्त्रका उच्चार करने योग्य बननेके लिए पहली अगस्त- को आपको खादी पहननी पड़ेगी। मेरा खयाल है कि भारतको आर्थिक रूपसे स्वाधीन बनाने और उसके जरिये स्वराज्य हासिल करनेके लिए हर भारतीय द्वारा विदेशी वस्त्रोंका त्याग करना एक सबसे जरूरी शर्त है। इसके अनुरूप अपने-आपको बनाना भारतकी सामर्थ्य से बाहर नहीं है । आशा है कि लोग इसके इच्छुक भी हैं। मैं आप लोगोंका ध्यान मेसर्स शॉ वैलेस ऐंड कम्पनी द्वारा श्री कशालकरको कोई जवाब देनेका अवसर दिये बिना बरखास्त किये जानेकी ओर भी दिलाना चाहता हूँ। उनका कसूर सिर्फ इतना था कि उन्होंने हाथकी कती खादीकी टोपी पहननेका Gandhi Heritage Porta