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पृष्ठ:सम्पूर्ण गाँधी वांग्मय Sampurna Gandhi, vol. 20.pdf/४३५

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टिप्पणियाँ ४०३ हो जायें तो समझना चाहिए कि देशने असहयोगका त्याग कर दिया है । ये दोनों परस्पर विरोधी बातें हैं । यदि दंगे-फसाद होंगे तो बदमाश लोग एक क्षणके लिए ऐसा सोच सकते हैं कि उनसे उन्हें फायदा पहुँचेगा । संसारमें सदा ऐसा होता आया है । जिस पत्र लेखकने उक्त दो सवाल पूछे हैं वह इस बातको भूल गया है कि यह लड़ाई धर्मकी है, आत्मशुद्धिकी है, ईश्वरसे डरनेकी है और मनुष्यसे निर्भय रहनेकी है। सरौतेके बीच सुपारी एक सहानुभूति रखनेवाले पारसी भाईने पारसियोंकी सभा के बाद कुछ शंकाएँ उठाई थीं। ये शंकाएँ विचारणीय हैं इसलिए मैं उनके सम्बन्धमें यहाँ संक्षेपमें विचार करता हूँ । ये भाई कहते हैं : (१) आपके जैसे विचार सब नेताओंके नहीं हैं; क्या आप यह जानते हैं? कदाचित् आप यह नहीं जानते कि बम्बई में पारसियोंके सम्बन्धमें जो सामान्य विचार प्रकट किये जाते हैं उनमें द्वेष-भावना होती है। इसको रोकने- के लिए आप क्या उपाय कर रहे हैं और आगे क्या उपाय करेंगे ? (२) पारसियों की स्थिति ऐसी ही है जैसे “सरौतेके बीच सुपारी" की होती है। उनमें पूरी देशभक्ति है, इसलिए वे देशका कार्य करना नहीं छोड़ सकते। उसी तरह वे अबतक जिस सुरक्षित व्यवस्था में रहते आये हैं उसको खतरे में डालना भी उन्हें कठिन लगता है। यदि आपके हाथसे देशकी बागडोर निकल जाये अथवा आपकी मृत्युके बाद देशमें इस महान् जागृतिके परिणाम- स्वरूप लोगों में समभाव न रहे तो पारसी लोग अवश्य ही कुचले जायेंगे । ये दोनों शंकाएँ ऐसी नहीं हैं जिन्हें यों ही छोड़ दिया जाये। मैंने पारसियों के सम्बन्धमें जो विचार व्यक्त किये हैं वे विचार यदि समस्त समाजके न हों, मेरे अपने ही हों तो लेखकने ऊपर जो भय प्रकट किया है वह विचारणीय माना जाना चाहिए। यह बात तो सच है कि किसी-किसी क्षेत्रमें पारसियोंकी जो आलोचना की जाती है उसमें द्वेषभाव होता है । पारसियोंकी जाति बहुत छोटी जाति है इसलिए उनका दोष आसानीसे निगाह के सामने आ जाता है और उनके गुणोंपर परदा पड़ जाता है। इस कारण हमें सदा उनके गुणोंपर ही दृष्टि रखनी चाहिए । जब हम लोगोंके गुणोंको ही देखेंगे तभी उनपर हमारा प्रेम बढ़ेगा। पारसी लोग हमारे भाई हैं, यह समझकर हमें उनकी उदारता, धैर्यशीलता, विनय, बुद्धिमत्ता, आस्तिकता और भारी सादगीको अवश्य देखना चाहिए और उनके किसी भी ऐसे दोषको न देखना चाहिए जो हममें भी न हो । पारसी लोग भारतमें रहते हैं इससे भारतकी कोई हानि हुई है ऐसी कोई बात खयालमें आ ही नहीं सकती। उनके भारतमें आनेसे भारतको लाभ पहुँचा है, यह बात हम आसानीसे देख सकते हैं। पारसी लोगोंपर सबसे बड़ा आरोप तो यह है कि वे पाश्चात्य सभ्यताकी कोरी नकल कर रहे हैं और भारतीय सभ्यताको दिनपर-दिन छोड़ते जा रहे हैं । यदि हम गहराईसे सोचें तो हमें मालूम होगा कि यह बात भी सही नहीं है । उनपर पाश्चात्य सभ्यताका बहुत अवांछनीय असर हुआ है, Gandhi Heritage Portal