________________
४०४ सम्पूर्ण गांधी वाङ्मय यह मैं स्वीकार करता हूँ । किन्तु यह असर जितना हिन्दुओं और मुसलमानोंपर हुआ है उतना ही पारसियोंपर भी हुआ है । किन्तु उन्होंने जो फेरफार किया है वह इस कारण स्पष्ट दिखाई देता है कि उनकी संख्या अधिक नहीं है और वे प्रायः बम्बई में ही रहते हैं। इसके विपरीत जो हिन्दू और मुसलमान बिलकुल अंग्रेज बन गये हैं, जहाँ-तहाँ बिखरे होनेसे निगाह में कम आते हैं। में जो बात कह रहा हूँ उसको वे लोग पूरी तरह समझ जायेंगे जो इंग्लैंड हो आय हैं। वहाँ मैंने पारसियों, हिन्दुओं और मुसलमानोंमें कोई भी अन्तर नहीं देखा । वहाँ मुझे सभी पूरे अंग्रेज जान पड़े। किन्तु अब ? जैसा हिन्दुओं और मुसलमानोंमें परिवर्तन हुआ है वैसा ही परिवर्तन पारसियों में भी आरम्भ हुआ है । पारसी नवयुवक सादगीके मन्त्रको समझ गये हैं । पारसी लड़कियाँ खादी पहनने लगी हैं। खादी पहननेकी जिनकी हिम्मत नहीं होती, वे देशी मिलोंके कपड़े पहनने लगी हैं। मेरी मान्यता यह है कि जब पारसी लोगोंके मनके प्रवाहकी दशा बदलेगी तब क्षणभरमें महत्त्वपूर्ण फेरफार हो जायेगा । मेरे मनपर ऐसी छाप पड़ी है कि पारसी जाति कभी नमक हराम नहीं हो सकेगी। यह सम्भव है कि वह अल्प- संख्यक होनेसे हिन्दुओं और मुसलमानोंके समान मैदानमें आती हुई न जान पड़े; किन्तु मेरे मनसे यह बात नहीं निकलती कि उनके हाड़-माँसमें भी भारतीयता है और उन्हें भारतसे प्रेम है । पारसी लोग किसी मामलेमें पीछे रहे हों यह मैं तो जानता ही नहीं । इसलिए हिन्दुओं और मुसलमानोंको यह उचित है कि वे पारसियोंसे प्रेम करें और उनके दोष न निकालें और न उनकी ओर संकेत ही करें। पारसी भाइयोंको डरनेकी कोई जरूरत नहीं है। जिन्होंने दूसरे लोगोंका कुछ नहीं बिगाड़ा है उनको किसी तरहका डर नहीं होना चाहिए। पैगम्बर जरतुश्तने यह शिक्षा दी है कि भलाईका बदला सदा भलाई होता है । एक छोटी जातिके मनमें जैसे भय होता है वैसे ही निडरता भी होती है । पारसियोंको यह जानकर कि उन्होंने भारतका कुछ बिगाड़ा नहीं है यह मान लेना चाहिए कि भारत उनका कोई अहित न करेगा। जिस जाति या मनुष्यने भारत के हितके विरुद्ध अपना स्वार्थ सिद्ध किया हो उसीको डरनेकी जरूरत है। निर्दोष मनुष्य अकेला भी हो तो भी उसे डरनेकी जरूरत नहीं। फिर यह लड़ाई आत्मशुद्धिकी लड़ाई है ऐसा मानकर में पारसी भाई- बहनोंको विनयपूर्वक यह सलाह देता हूँ कि वे इस लड़ाईमें पूरे मनसे शामिल हो जायें। इस लड़ाई में हमें एक-दूसरेपर विश्वास करना चाहिए। इस तरहका विश्वास उत्पन्न करनेका उपाय है अपने मनमें आत्मविश्वास पैदा करना और आत्मविश्वास ही स्वराज्य है । मर्यादाका उल्लंघन कोई सज्जन मेरे चित्र कृष्णके रूपमें छापकर बेच रहे हैं। एक भाईने मेरा ध्यान इस ओर खींचा है और इसमें मर्यादाका जो उल्लंघन होता है उसे रोकने के लिए मुझे लिखा है । मैंने ऐसा कोई चित्र नहीं देखा है। उसे देखनेकी मेरी इच्छा Gandhi Heritage Portal