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४१४ सम्पूर्ण गांधी वाङ्मय शान्त बनाये रखने के लिए हर कोशिश की थी; अलबत्ता उन्होंने 'नाक रगड़ने' से इनकार कर दिया था और लोगों में उत्साह बनाये रखनेका प्रयत्न किया था । अब उनको भी गिरफ्तार कर लिया गया है। सारी गड़बड़ी की जिम्मेदारी किसपर है ? गड़बड़ी धरनेके समय शुरू हुई थी। श्री गंगाधरराव देशपाण्डेने मुझे बेलगाँवसे तार भेजकर सूचित किया है कि उनको और उनके मित्रोंको आदेश दिया गया है कि वे वहाँ छावनीके हलके में शराबके ठेकोंपर धरना न दें। श्री देशपाण्डेने पूछा है कि वे इस आदेशका पालन करें या न करें। मैंने श्री देशपाण्डेको यही सलाह दी है कि आदेश गैर-कानूनी तो है पर उसका पालन किया जाना चाहिए और सविनय अवज्ञा भी संयत ढंग से करना ही ठीक होगा। शराब-विक्रेताओंका फर्ज है कि वे अपने करोड़ों देशवासियोंकी इच्छाका आदर करें। अपने ठेके बन्द करके, आप अपने देश- को लाभ पहुँचायेंगे और जो चीज पूरे देशके हित में है वह आपके भी हितकी चीज है । में पक्की तौरपर जानता हूँ कि शराबके कुछ ठेकेदारोंकी माली हालत अच्छी नहीं है । देशकी जनताका फर्ज है कि वह इन लोगोंकी सहायता के लिए जो भी कर सकती हो, करे। लेकिन आप लोगोंको भी यह स्वीकार करना चाहिए कि आप अपने ठेके चालू रखकर देशको नुकसान पहुँचा रहे हैं । श्री गांधीने शराब के ठेकेदारोंको चेतावनी दी कि अगर आपने अगस्तके अन्ततक कुछ नहीं किया तो बड़ी गड़बड़ी मच जायेगी। दुबारा जब धरना देना शुरू किया जायेगा तो वह काफी संजीदगीसे किया जायेगा। धरना देनेवाले लोग धरना छोड़ने- की अपेक्षा जेल जाना और यहाँतक कि गोली खाना ही ज्यादा पसन्द करेंगे । मैं महसूस करता हूँ कि ठेके बन्द हो जाने चाहिए, चाहे फिर सरकारी आदेशपर धरना देना बन्द न करनेपर खूनकी नदियाँ ही बह चलें। मैं आपसे यह वायदा नहीं कर सकता कि अगस्त महीने में फिरसे धरना देना शुरू नहीं किया जायेगा। क्योंकि धरना देनेवालों ने जिस बातका अहद किया है वह उन्हें कामयाबीके साथ पूरा करना ही चाहिए, फिर उनको चाहे जितनी बड़ी कीमत क्यों न चुकानी पड़े। मेरे पास कई पत्र आ चुके हैं जिनमें कहा गया है कि धरने बन्द करके मैंने ठीक नहीं किया। मुझपर दोष लगाया गया है कि मैंने अली भाइयोंको कमजोर सलाह दी और मुझे इस बात के लिए भी दोषी ठहराया गया है कि मैंने पहले सत्याग्रह आन्दोलन बन्द करवा दिया था और अब धरने भी बन्द करा दिये हैं। मैंने अली भाइयोंको जो सलाह दी थी वह कमजोरीकी सलाह नहीं थी, वह मजबूती पैदा करनेवाली सलाह थी और सत्याग्रह तथा धरनोंके मामले में भी यही बात है । इसीलिए मैं आपसे अनुरोध करता हूँ कि आप देशकी आवाजपर कान दें और देशको आसन्न बलिदान से बचायें । में किसी रोगसे पीड़ित होकर मरने की बजाय धरना देते हुए मरना ही ज्यादा पसन्द करूँगा । मुझे इसमें तनिक भी सन्देह नहीं कि और भी बहुतसे लोग ऐसा ही करनेके लिए तैयार हैं । Gandhi Heritage Porta