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४१८ सम्पूर्ण गांधी वाङ्मय बरसी मनानेको इकट्ठे हुए हैं। उन्होंने हमें स्वराज्यके महामन्त्रकी वीक्षा दी थी। स्वराज्य पानेके लिए सबसे आसान और सम्भव उपाय स्वदेशी ही है। उससे नंगोंको वस्त्र और भूखोंको भोजन मिलेगा । २ करोड़ भारतीय आधा पेट खाकर बसर कर रहे हैं। महाराष्ट्र बुद्धिमान है, महाराष्ट्रमें विद्या है, महाराष्ट्र हर प्रकारका त्याग करने को तैयार रहता है परन्तु उसमें विश्वासकी कमी है। यदि महाराष्ट्र स्वदेशी धर्मको अविचल विश्वाससे अपनाये तो साल-भरके अन्दर स्वराज्य मिलना निश्चित है । भाषण समाप्त करते हुए गांधीजीने आशा व्यक्त की कि महाराष्ट्र तिलक महा- राजके योग्य साबित होगा । [ अंग्रेजीसे ] बॉम्बे क्रॉनिकल, २४-७-१९२१ २००. भाषण : तिलक महाविद्यालयके उद्घाटनपर' २० जुलाई, १९२१ तिलक महाविद्यालयके भवनका उद्घाटन करते हुए विद्यालयके मन्त्री प्रोफेसर घारपुरे द्वारा परिचयात्मक भाषण दिये जानेके बाद महात्मा गांधीने कहा कि देशमें सभी जगह राष्ट्रीय स्कूल और कालेज खोले गये । उन्होंने बिहारकी विशेष रूप से प्रशंसा की, क्योंकि वह आलस्य और निद्राको एकदम त्यागकर असहयोग कार्यक्रमके लगभग सभी अंगोंको पूरा करनेमें सफल हुआ है। श्री चित्तरंजन दासने बंगालके असह- योगी विद्यार्थियोंके लिए व्यवस्था कर दी है। इस दिशा में उनका त्याग निश्चय ही अद्वितीय है। गुजरातमें भी एक राष्ट्रीय विश्वविद्यालय है । परन्तु विश्वविद्यालय तो हमारी शिक्षा-प्रणाली कैसी हो यह सामने रखनेके लिए खोले गये हैं। मुझे यह देखकर खुशी हुई है कि तिलक महाविद्यालय में औद्योगिक और व्यावसायिक प्रशिक्षणके लिए भी व्यवस्था की गई है। निःसन्देह यह इस संस्थाकी एक विशेषता है । इसलिए यह तथ्य कि ये महाविद्यालय सरकारी संस्थाओंकी कोरी नकल-भर नहीं हैं, भविष्यमें 'टाइम्स ऑफ इंडिया' की नुक्ताचीनी बन्द कर देनेके लिए काफी होगा। गांधीजीने अन्तमें कहा, मैं आशा करता हूँ कि विद्यालय ऐसे विद्यार्थी तैयार करेगा जो उस महापुरुषके नामको उज्ज्वल करेंगे, जिसके नामपर यह खोला गया है। [ अंग्रेजीसे ] बॉम्बे क्रॉनिकल, २४-७-१९२१ 132 १. पूना में। Gandhi Heritage Portal