४२६ सम्पूर्ण गांधी वाङ्मय पर्वतीय लोगोंको अपने विश्वसनीय नेतापर किये गये इस अत्याचारके विषयमें बुरा लगना स्वाभाविक है । आशा है कि जबतक उनके नेताको छोड़ नहीं दिया जायेगा तबतक वे श्री स्टोक्सके नेतृत्वमें चलकर किसी भी तरहकी बेगार करनेसे दृढ़तापूर्वक इनकार कर देंगे; फिर उसके लिए उनको पूरे पैसे भी क्यों न मिलें ? उन्हें कमजोर नहीं पड़ना चाहिए, बल्कि एक संकल्प करके स्वयं ही अधिकारियोंके क्रोधका सामना करनेके लिए डट जाना चाहिए और अपने नेताके समान जेलकी सजाका सामना करना चाहिए । बेगार कायम रखनेके लिए यह हठ क्यों किया जाता है ? अधिकारियोंकी सत्ता, शान और सुविधाके लिए। और इसलिए कि अधिकारियोंका काम बेगारसे ही चलता है । बेगारके बिना वे हिमालयके जंगलोंमें शिकार नहीं खेल सकते। यदि बेगार बन्द हो गई होती तो ड्यूकको पहाड़ी किलोंमें शिकारके लिए नहीं ले जाया जा सकता था। यदि इसे लुत्फ माना जाये तो शेरों और भोले-भाले जानवरोंके शिकार करनेका लुत्फ उठाने के लिए हजारों अनिच्छुक गाँववालों के परिश्रमके बलपर वहाँतक एक नया रास्ता तैयार कराना पड़ा था । यदि पशुओंके पास हमारी समझमें आने लायक वाणी होती तो वे अपना पक्ष ऐसे शब्दोंमें प्रस्तुत करते कि मानवता स्तब्ध रह जाती। जो जंगली जानवर हमें परेशान करने आते हैं, उनको मारनेकी बात तो मैं समझ सकता हूँ, पर मनुष्यकी रक्त-पिपासा शान्त करनेके लिए किये जानेवाले आयोजनोंपर बहुत पैसा लुटानेके पक्षमें जो तर्क दिये जाते हैं उनमें से कोई भी मुझे ठीक नहीं जँचता । यदि बेगार प्रथा न होती तो अधिकारियों या पर्यटकों के मनोरंजन के लिए शिकारके आयोजन भी न हो पाते। मुझे भारतीय राजाओंके रीति-रिवाज और महाभारत के दृष्टान्त बतलानेकी कोई जरूरत नहीं है। जिन दृष्टान्तों या रीति-रिवाजोंको मैं ठीक नहीं समझता या जिनका नैतिक आधारपर समर्थन नहीं कर सकता, मैं उनका दास बननेके लिए तैयार नहीं [ अंग्रेजीसे | यंग इंडिया, २१-७-१९२१ २०३. स्त्रियोंकी स्थिति कटककी श्रीमती सरलादेवी लिखती हैं : क्या आप यह नहीं मानते कि स्त्रियोंके प्रति किया जानेवाला दुव्यंव- हार भी अस्पृश्यताकी तरह व्यापक रोग है । में जिन तरुण 'राष्ट्रवादियों' के सम्पर्क में आई हूँ उनमें से नब्बे प्रतिशतका दृष्टिकोण मैंने इस मामलेमें पशुवत् पाया है । भारतमें कितने असहयोगी हैं जो स्त्रियोंको केवल भोगकी वस्तु नहीं समझते ? क्या स्त्रियोंके प्रति अपने दृष्टिकोणमें परिवर्तन किये बिना भी सफ- लताको आवश्यक शर्त -- आत्मशुद्धि - सम्भव है ? --- Gandhi Heritage Portal
पृष्ठ:सम्पूर्ण गाँधी वांग्मय Sampurna Gandhi, vol. 20.pdf/४५८
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