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पृष्ठ:सम्पूर्ण गाँधी वांग्मय Sampurna Gandhi, vol. 20.pdf/४८०

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४४८ सम्पूर्ण गांधी वाङ्मय उनमें अपनी राष्ट्रीय पोशाक पहननेकी हिम्मत थी, जिसे आप चाहें तो उनकी श्रद्धाका प्रतीक भी कह सकते हैं । ये घमंडी पेढ़ियाँ यह सहन नहीं कर सकीं कि उनके क्लर्क ऐसी हिम्मत दिखायें । जिस समय भारतकी नारियाँ अपने नारीत्वको और भारतके पुरुष अपने पुरुषत्वको अनुभव करने लग जायेंगे, उसी समय भारत स्वतन्त्र हो जायेगा । तब दुनियाकी कोई ताकत उसे स्वतन्त्र होनेसे नहीं रोक सकती। इसलिए इन दोनों व्यक्तियोंको नौकरीसे निकाल दिये जानेका हमारे लिए बहुत बड़ा अर्थ होना चाहिए। और मुझे स्वीकार करना चाहिए कि इन पेढ़ियोंके अन्य कर्मचारियोंकी निष्क्रियतासे मुझे दुःखजनक निराशा हुई है। उन्हें कमसे कम साधारण मजदूरोंका-सा साहस तो दिखाना ही था । भारत में एक पीड़ित भाईके लिए बड़ी भारी हड़ताल होनेके उदाहरण अनेक मिल सकते हैं। क्या इन पेढ़ियोंके क्लकोंके मनमें अपने भाईके लिए कोई दर्द नहीं है ? क्या वे समूचे भारतसे अपने निकट सम्बन्धका दावा कर सकते हैं? यदि उनके किसी सगे भाईके साथ वैसा ही व्यवहार किया गया होता, जैसा कि इन दो बहादुर नौजवानोंके साथ किया गया, तो वे क्या करते ? पर इन पेढ़ियोंके कर्मचारी अब भी अपनी गलती सुधार सकते हैं। वे विरोधस्वरूप अब भी खादीकी सफेद टोपियाँ पहन सकते हैं और अपने उन क्लर्क भाइयोंको उनके पदोंपर फिरसे नियुक्त करनेकी माँग कर सकते हैं। मैं इन दोनों बड़ी पेढ़ियोंके मैनेजरोंको भी नम्रतापूर्वक सावधान करता हूँ । असहयोगी जातिवादसे बचे हुए हैं। वे अपनी पूरी ताकतसे एक दूषित प्रणालीसे लड़ रहे हैं। व्यक्तिश: अंग्रेजोंसे उनका कोई झगड़ा नहीं है । परन्तु यदि अंग्रेज इन पेढ़ियोंके मैनेजरोंकी तरह पक्षपात करेंगे तो जाति विस्फोटको रोकना मुश्किल होगा। यदि यूरोपीय व्यापारी इस मामलेको बहुत जरूरी मानकर इन पेढ़ियोंकी भयंकर गलतियोंको फौरन ठीक न करेंगे तो यूरोपीय पेढ़ियोंका बहिष्कार किये जानेका भय है । क्षमा मँगवानेका प्रयत्न इंडिपेंडेंट' में प्रकाशित सर्वश्री जवाहरलाल नेहरू, जोजेफ और रंगा अय्यर तथा संयुक्त प्रान्तकी सरकारके बीच हुए पत्र-व्यवहारसे यह सिद्ध होता है कि मेरा वाइसरायके पास जाना और अली भाइयोंको अपने कुछ भाषणोंके लिए क्षमा माँगनेकी राय देना, राजनीतिक दृष्टिसे बहुत बड़ी भूल थी । अब यह अधिकाधिक स्पष्ट होता जा रहा है, जैसा कि मौलाना अब्दुल बारीने कहा है, कि जहाँ मेरे वाइसरायके पास जानेसे और अली भाइयों द्वारा क्षमा-याचना करनेसे हुई हानि प्रत्यक्ष है, वहाँ इनसे कदाचित् कुछ लाभ हुआ है तो वह इतना अस्पष्ट है कि जनता उसे नहीं देख सकती । सौभाग्यसे मैं राजनीतिज्ञ नहीं हूँ। और संयुक्त प्रान्तकी सरकारने जवाहरलाल नेहरू तथा उनके साथियोंको फँसाने के लिए अली भाइयोंकी क्षमा-याचनाका जो निन्दनीय उपयोग किया है, उसके पीछे छिपी भलाईको में देखता हूँ । सरकारने तो अली भाइयोंकी क्षमा- याचनाकी शब्दावलीका अनुकरण तक किया है। लोग प्रायः गलत जगहपर रखी हुई वस्तुको गन्दगी कहते हैं और यह ठीक ही है । ठीक इसी तरह जहाँ मैं यह मानता हूँ कि अली भाइयोंकी क्षमा-याचना ठीक जगहपर होनेके कारण एक सम्मानजनक बात Gandhi Heritage Portal