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पृष्ठ:सम्पूर्ण गाँधी वांग्मय Sampurna Gandhi, vol. 20.pdf/४८८

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४५६ सम्पूर्ण गांधी वाङ्मय जोर-जबरदस्ती कर रहे हैं । वे शरारती लोगोंके षड्यन्त्रोंमें आसानीसे फँस जाते हैं और इन षड्यन्त्रोंके पीछे सदा सरकारका हाथ नहीं होता । गोरक्षा हिन्दुओंको अत्यन्त प्रिय है । इसलिए हम इस प्रश्नपर प्रायः उत्तेजनाके शिकार हो जाते हैं और इस प्रकार अनजाने अपने प्रिय उद्देश्यको हानि पहुँचानेके साधन बन जाते हैं। हमें यह मान लेना चाहिए कि हमारे मुसलमान भाइयोंने अपने हिन्दू भाइयोंकी खातिर गायकी जान बचाने के लिए बहुत उद्योग किया है। उसका मूल्य कम आँकना गम्भीर भूल होगी । हमारा अपनी बातपर जोर देना उनके समस्त उद्योगको व्यर्थ कर देना है । हमने पिछले कुछ सालों में गोवधको या तो बिना किसी आपत्तिके ही सहन किया है; या आपत्ति की है तो वह केवल प्रभावहीन और हिंसात्मक आपत्ति रही है। हमने अपनी ओरसे अपने देशमें रहनेवाले मुसलमान भाइयोंसे अपने सम्बन्ध प्रेमपूर्ण बनानेका कोई प्रयत्न नहीं किया है और इस बातकी पात्रता प्राप्त नहीं की है कि हमारे ये भाई इस बारे में अपने ऊपर स्वयं अंकुश लगा लें। हमने प्रायः अकारण ही यह मान लिया है कि यह कार्य असम्भव है । किन्तु हम अब उनके इस संकट - कालमें सोच-समझकर उनकी सहायता करनेका विचारपूर्ण प्रयत्न कर रहे हैं। हमने यह कार्य अपनी इच्छासे किया है। इसके सत्- प्रभावको हमें सौदेबाजी करके नष्ट नहीं कर देना चाहिए। मित्रता कदापि सौदेकी वस्तु नहीं हो सकती । वह तो एक ऐसी स्थिति होती है जिसमें किसी भी बदलेका खयाल नहीं किया जाता । सेवा करना कर्त्तव्य है और कर्त्तव्य एक ऋण है। इस ऋणको चुकता न करना पाप है। यदि हम मुसलमानोंसे अपना मित्रभाव सिद्ध करना चाहते हैं तो हमारे ये भाई गायकी रक्षा करें चाहे न करें हमें उनकी सहायता करनी चाहिए। हमारे प्रति उनका जो व्यवहार है हम उसकी जिम्मेदारी उन्हींपर डालते हैं । हम उनसे यह कहने की धृष्टता नहीं करते कि हमारी सहायताके बदले में उन्हें क्या करना चाहिए। वह तो खरीदी हुई सहायता होगी। यदि मुसलमान इसको स्वीकार करनेसे इनकार कर दें तो हम इसके लिए उन्हें दोष नहीं दे सकते । इसलिए मुझे आशा है कि मुसलमान बकरीदपर चाहे कुछ भी करें, बिहारके वस्तुतः समस्त भारतके, हिन्दू पूरी सहिष्णुता दिखाने की आवश्यकताको अनुभव करेंगे। वे कौन-सा मार्ग पसन्द करते हैं, यह बात हमें उन्हींपर छोड़ देनी चाहिए। अमृतसरमें जो काम हकीम अजमल खाँने एक घंटे में कर दिया उसे हिन्दू वर्षों प्रयत्न करते तो भी नहीं कर सकते थे। पिछली बकरीदपर श्री छोटानी और श्री खत्रीने जिन गायोंकी रक्षा की उनकी रक्षा बम्बईके करोड़पति अपनी समस्त सम्पत्ति दे देते तो भी नहीं कर सकते थे। मुसलमानोंपर जितना अधिक दबाव डाला जायेगा, गोवध उतना ही अधिक होगा। हमें इस मामलेको उनकी सचाईकी भावना और कर्त्तव्य-बुद्धिपर छोड़ देना चाहिए। इस प्रकार हम गायकी बड़ी से बड़ी सेवा करेंगे । गोरक्षाका उपाय मुसलमानोंको मारना या उनसे झगड़ा करना नहीं है । उसका उपाय यह है कि हिन्दू खिलाफतको रक्षामें अपनी जान दे दें और गायका कोई उल्लेख न करें । गोरक्षा एक शुद्धिकी प्रक्रिया है । यह एक तपस्या है। हम जब स्वेच्छापूर्वक Gandhi Heritage Portal