२२१. टिप्पणी मऊमें झगड़ा इन्दौर के पास मऊ एक बड़ी सरकारी छावनी है जहाँ हिन्दू और मुसलमान दोनों ही रहते हैं । कुछ दिन पहले अखबारोंमें इधर-उधर कहीं एक खबर छपी देखी थी कि वहाँ बोहरा और सुन्नी मुसलमानोंमें मारपीट हो गई है। कहा जाता है कि इसमें एक बोहरा मारा गया और कई लोग घायल हो गये । कहा जाता है कि बोहरा भाइयोंने स्वराज्य-कोषमें रुपया देनेसे इनकार किया था, इसी बातको लेकर वहाँ झगड़ा हो गया। कुछ भी हो, बोहरा और सुन्नी मुसलमानोंमें अनबन दिखाई देती है । गोधरामें भी यह बात देखने में आई है। रतलाम में भी ऐसी ही घटना हुई है । बोहरा लोग भारत-भरमें कुल मिलाकर केवल तीन लाख हैं । जिनकी संख्या इतनी कम है ऐसे लोगोंको प्रश्रय देना बड़ी जातियोंका धर्म हैं । यदि बोहरा भाई खिलाफत या स्वराज्य आन्दोलनमें भाग न लें तो भी हमें उनको परेशान नहीं करना चाहिए। सम्भव है, कोई छोटी जाति डरके कारण अथवा परिणामका खयाल करके मैदानमें न भी आये । ऐसी स्थितिमें किसी बातके सम्बन्धमें उसपर जोर डालना उचित नहीं माना जा सकता। मुझे यह भी बताया गया है कि मऊमें हिन्दुओंने बोहरोंके विरोधियोंका पक्ष लिया था । मैं अनुभव करता हूँ कि जब एक धर्मके लोगोंमें कोई झगड़ा हो तो दूसरे धर्मके लोगोंको तटस्थ ही रहना चाहिए। उनका कर्त्तव्य है कि वे उन दोनोंको समझाने और उनमें मेल करवानेका उद्योग करें। जैसे हिन्दू-हिन्दूकी लड़ाईमें मुसल- मानोंका किसी एक या दूसरे पक्षका साथ देना अनुचित है वैसे ही मुसलमान - मुसल- मानके झगड़े में हिन्दुओंका पक्ष लेना भी अनुचित है। खिलाफत के हरेक कार्यकर्ताका कर्तव्य है कि वह जहाँ-कहीं भी झगड़ा होनेका डर हो, वहाँ उसे रोकनेका प्रयत्न करे । [ गुजरातीसे ] नवजीवन, २८-७-१९२१ २२२. तार : हैदराबादके एक असहयोगीको असहयोगी गवाही नहीं दे सकते । [ अंग्रेजीसे ] बॉम्बे सीक्रेट एक्स्ट्रैक्ट्स, १९२१ २९ जुलाई, १९२१ Gandhi Heritage Portal
पृष्ठ:सम्पूर्ण गाँधी वांग्मय Sampurna Gandhi, vol. 20.pdf/४९३
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