२२३. अ० भा० कां० कमेटीको बैठकमें बहिष्कारपर बहस [ ३० जुलाई, १९२१ के पूर्व ] [ गांधीजी : जूनके महीने में जब हमने एक करोड़ रुपया इकट्ठा किया उस समय हममें जो उत्साह और स्फूर्ति थी वह अब कहाँ है ? आज हम इस बातको लेकर सशंकित हैं कि कौन जाने हम विदेशी कपड़ेका बहिष्कार कर सकेंगे या नहीं । लेकिन हमारी दुर्बलता ही हमारे इस भयका कारण है । हम शान्तिसे विचार करें तो मालूम होगा कि बहिष्कारके बाद हमारे लिए कुछ और करनेको नहीं रह जायेगा । मैं जैसे-जैसे विचार करता हूँ वैसे-वैसे मुझे लगता है कि हमें सिपाहियोंको हथियार छोड़ देनेकी तथा करदाताओंको कर न देनेकी सलाह देनेकी भी जरूरत नहीं रहेगी । हम यदि सम्पूर्ण रूपसे बहिष्कार कर सकें तो थोड़ेसे ही लोगोंको कानूनका सविनय भंग करके जेल जानेकी जरूरत होगी और थोड़ेसे लोगोंको ही आत्मत्याग करना होगा । अतएव हमें गमगीन, हताश अथवा पस्त- हिम्मत नहीं होना चाहिए। लोगोंने स्वदेशी और बहिष्कारसे सम्बन्धित कुछ एक प्रश्न मुझसे पूछे हैं। मैं अब उनका उत्तर दूंगा । प्रश्न: हम अगर आजसे नये विदेशी कपड़े न लेनेका व्रत लें और हमारे पास जो विदेशी कपड़े हैं उन्हें पहनकर फाड़ डालें तो इसमें क्या बुराई है ? उत्तर : मेरी समझमें नहीं आता कि जिस वस्तुको हमने एक बार कलुषित मान लिया हम उसे अपने पास सँजोकर कैसे रख सकते हैं ? विदेशी कपड़ा पहनना अगर हमारे लिए अधर्म है तो फिर हम क्षण-भर के लिए भी कैसे उसे अपने पास रख सकते हैं ? किसीके घरमें प्रवेश करके अगर मैं जबरदस्ती उसका चूल्हा तोड़ डालूं तो यह घोर पाप माना जायेगा । विदेशी कपड़े के व्यापारने हमारे गरीब वर्गका चूल्हा तोड़ डाला है, हमारे उद्योगको प्रायः समाप्त कर दिया है और अनेक लोगोंको भुखमरीकी स्थिति- में डाल दिया है । इस व्यापारके मोहमें हमने स्वयं अपने पेटपर लात मारी है; यह भी घोर पाप हुआ है। यदि कोई हमारे पाँवकी बेड़ियोंको तोड़ डाले तो क्या उसके टुकड़ोंको हम सँभालकर रखेंगे ? मैं जानता हूँ कि जैसे दीर्घ कालतक पहनी गई बेड़ियोंसे गुलामको मोह हो जाता है उसी तरह हमारे मनमें भी विदेशी कपड़े के प्रति मोह पैदा हो गया है और इसीसे हमारे मनमें ऐसे प्रश्न उठते हैं । हम स्वयं भले ही अपने विदेशी कपड़ोंका त्याग कर दें; किन्तु हम वे कपड़े अपने देश के गरीबों को और अर्ध-नग्नावस्था में घूमनेवाले बहनों और भाइयोंको क्यों न दे दें? उन्हें कपड़े देकर उनकी आत्माको क्यों न शीतल करें ? हम ये कपड़े विदेशों- में-- हिन्दसे बाहर -- किसलिए भेजें ? १. अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटीकी बैठक २८ से ३० जुलाईतक बम्बई में हुई थी । Gandhi Heritage Portal
पृष्ठ:सम्पूर्ण गाँधी वांग्मय Sampurna Gandhi, vol. 20.pdf/४९४
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