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पृष्ठ:सम्पूर्ण गाँधी वांग्मय Sampurna Gandhi, vol. 20.pdf/५०१

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भाषण : बम्बई में स्वदेशीपर ४६९ को अच्छी तरह जानता हूँ। मैं जिस समाजके साथ इतने वर्ष रह चुका हूँ उसे कैसे नहीं जानूँगा ? जिन स्त्री-पुरुषोंने तिलक स्वराज्य-कोषके लिए इतना धन दिया हैं, जिन महिलाओंने अपने जेवर त्याग दिये हैं, उन्हें अब पहली अगस्तको अपने कर्तव्यमें नहीं चूकना चाहिए। इस तारीखसे उन सबको अपने विदेशी वस्त्र छोड़ देने चाहिए। जिसे पहनना वे पाप समझते हैं उसे एक क्षण भी अपने पास नहीं रखना चाहिए। उन्हें यह अवश्य जान लेना चाहिए कि इन विदेशी वस्त्रोंको पहनकर वे अपने करोड़ों देशभाइयोंको भूखा रख रहे हैं। वे विदेशी वस्त्र नष्ट कर दिये जाने चाहिए और अपने पास कतई नहीं रखने चाहिए, क्योंकि वे पापसे रंगे हुए हैं। उनकी दृष्टिमें जिसे पहनना पापपूर्ण है वह गरीबोंके लिए भी पहनना पापपूर्ण है और इस- लिए मैं उनके कपड़ोंको गरीबोंको दे दिये जानेके पक्षमें नहीं हूँ । परन्तु यदि वे चाहें तो उन कपड़ोंको भारतसे बाहर स्मरना भेजा जा सकता है। मैं आप लोगोंसे खादी पहननेको कहता हूँ; गरीब लोगोंको मिलोंका बना कपड़ा पहनने दीजिए। जो कुछ हाथका बना है वह अधिक कलात्मक, अधिक सुन्दर और कुल मिलाकर मशीनकी बनी चीजसे बेहतर है। मशीनपर जो कुछ बनाया जाता है वह गरीबोंके लिए है। अमीर लोगोंको अपना सूत स्वयं कातना और उसे अपने बुनकरोंके पास भेजना चाहिए, ताकि वे उनकी पसन्दका कपड़ा तैयार कर दें। पहले, जब विदेशी कपड़ा पहनना शुरू नहीं हुआ था, ऐसा ही होता था । हम देशमें प्रचलित सभी प्रकारकी कलात्मक कारीगरीको भूल गये हैं और मिलोंमें तैयार की गई विदेशी चीजोंका प्रयोग करने लगे हैं, केवल इसलिए कि वे फ्रांस या इंग्लैंडसे आती हैं। क्या आप अपनेमें किसी प्रकारको मौलिकता नहीं ला सकते ? हर चीजके लिए विदेशोंका मुँह ताकना क्या अच्छी बात है ? क्या आप लोग अपनी सब कारीगरी भूल बैठे हैं और अपनी जरूरतोंको पूरा करने के लिए विदेशोंके मुहताज बन गये हैं ? मैं उनसे अपील करता हूँ कि अपनी विदेशी चीजें त्याग दें और अपने देशके लिए कुछ त्याग करें। जो कुछ आप करेंगे वह वास्तव में आपका त्याग कहा जायेगा, आप तो केवल देशसेवा कर रहे हैं। मुझे खुशी है कि अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटीके सभी सदस्य जिनकी संख्या लगभग ३०० है, शुद्ध श्वेत खादी पहनकर बम्बई आये हैं। मुझे अक्सर याद आ जाया करता है कि इसके बारेमें श्री पिक्यॉलने क्या कहा था। उन्होंने कहा था कि यदि आप अपनेको किसी नये रंगमें रंगना चाहते हैं तो पहले आपको अपनी सारी गन्दगी धोकर उजले बनना होगा --आपको कोई अन्य रंगीन कपड़ा अपनानेसे पहले शुद्ध सफेद खादी धारण करनी चाहिए। खादीमें पवित्रता है, शुद्धता है और सौन्दर्य है और उसे पहननेवालों को कोई असुविधा भी नहीं होती। वह हमारी भारतीय राष्ट्रीयताका ध्वज है और अब उसे अवश्य पहनने लगना चाहिए। इसके बाद गांधीजीने लोगोंसे कहा कि आप लोगोंके बीच जो शपथ प्रचारित की गई है, उसपर खूब सोच- विचार कीजिए और उसपर अपने हस्ताक्षर कीजिए। ऐसा खूब अच्छी तरह विचार Gandhi Heritage Portal