५१० सम्पूर्ण गांधी वाङ्मय रिहाईसे बड़ा दुःख पहुँचा है । यही सच्ची भावना है। और इस वर्ष स्वराज्य मिलना तभी सम्भव होगा जब हमारे देशके स्त्री-पुरुष स्वतन्त्रताके लिए संघर्ष करते हुए जेल जाना अपना सौभाग्य मानेंगे। स्पष्ट है कि गुण्टूरके लोगोंमें इसी तरहकी सही भावना मौजूद है। गिरफ्तारियोंकी खबर सुनकर श्री प्रकाशम् तुरन्त ही गुण्टूर गये और उन्होंने वहाँसे तार भेजा है कि वहाँ कई वकीलोंने अपनी वकालत मुल्तवी कर दी है और अब जनता कांग्रेसके असहयोग कार्यक्रमपर और भी दृढ़ताके साथ अमल करनेकी कोशिश कर रही है । हम लोग जब जेलोंसे बाहर उत्तरदायित्वपूर्ण ढंगसे स्वतन्त्रचेता व्यक्तियों- की तरह काम करने लगेंगे, तो सरकार हमें जेल भेजनेमें देर नहीं करेगी, और हम जितने दिन जेलसे बाहर रहेंगे, उतने दिन हमें भी यह विश्वास रहेगा कि हम अपना समय यों ही बरबाद नहीं कर रहे हैं । पहली अगस्तको ताकतका प्रदर्शन किसी पत्र लेखकने बड़े रोषके साथ पूछा है कि पहली अगस्तका मेरा अनुभव क्या है । पहली अगस्तका मेरा अनुभव यह है कि मैंने उससे अधिक व्यवस्थित भीड़ इससे पहले नहीं देखी थी। मैं पत्र लेखककी इस बातपर यकीन करता हूँ कि कुछ लोगोंको विदेशी टोपियाँ उतारनेके लिए मजबूर किया गया था। लेकिन मुझे पक्का भरोसा है कि ऐसे उदाहरण बिरले ही थे । स्वदेशीके प्रचारमें ताकतके इस्तेमालकी कोई गुंजाइश ही नहीं है, और मुझे इसमें किंचित् भी संदेह नहीं कि जोर-जबरदस्तीका इस्तेमाल हमारे अपने उद्देश्यको ही विफल बनानेवाला सिद्ध होगा । हम भारतको जबरन खादी पहननेपर मजबूर नहीं कर सकते । खादी पहनना तो स्वतन्त्रता और सम्मानका सूचक बन जाना चाहिए; लेकिन यदि उसके प्रचारमें जोर-जबरदस्तीसे काम लिया गया तो ऐसा नहीं हो सकता । बंगाल और मद्रासके चुनाव इसमें सन्देह नहीं कि बंगाल और मद्रासके चुनावोंके सम्बन्धमें लिये गये कार्य- समितिके निर्णयसे कुछ नाराजगी बढ़ेगी। इसलिए और भी कि यह निर्णय अध्यक्षके इस निर्देशके बावजूद किया गया था, कि संविधानकी व्यवस्थाके अनुसार चुनाव नहीं किये जा सकते। इससे जिन लोगोंको हानि पहुँची है; मुझे उनसे हमदर्दी है । पर मैं उनसे यही कहूँगा कि वे समितिके निर्णय के पीछे काम करनेवाले कारणोंको समुचित महत्त्व दें । मेरी अपनी राय यह है कि समितिके लिए सभी सम्बन्धित पक्षोंकी बात सुने बिना केवल कुछ मुद्दोंको ध्यान में रखकर ऐसा निर्णय देना सम्भव नहीं था । लेकिन अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी द्वारा निर्धारित कार्यक्रम पूरा करना था और सभी सम्बन्धित पक्षोंकी बात सुननेका समय कार्य समितिके पास रह ही नहीं गया था । यदि ऐसी जाँच-पड़ताल की जाती तो सारी प्रक्रिया पूरी होनेतक सदस्य उसी स्थितिमें बने रहते जिसमें वे आज हैं । इसलिए दूसरे पक्षके लोगोंके नवम्बरतक रुके रहनेसे कोई हानि नहीं होगी। और फिर ऐसे मामले अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटीके सामने तभी पेश करने चाहिए जब उनका स्थानीय तौरपर निबटारा करनेका यथासम्भव पूरा प्रयास कर लिया गया हो। इसके बिना उन्हें वहाँ पेश करना गलत होगा । । Gandhi Heritage Portal
पृष्ठ:सम्पूर्ण गाँधी वांग्मय Sampurna Gandhi, vol. 20.pdf/५४२
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