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पृष्ठ:सम्पूर्ण गाँधी वांग्मय Sampurna Gandhi, vol. 20.pdf/५६६

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५३४ सम्पूर्ण गांधी वाङ्मय भाषाके ये तीन वर्ग हो गये जान पड़ते हैं। फिर मुसलमान भाई गुजरातीको पारसियों जितना नहीं बिगाड़ते और उन्हें 'नवजीवन' की गुजरातीको समझनेमें भी कोई दिक्कत नहीं आती। खबरदार,' मलबारी' आदि लेखकोंने बता दिया है कि पारसी चाहें तो अच्छी गुजराती लिख अवश्य सकते हैं । मेरे पास कितने ही पारसियोंके पत्र आते हैं; उनमें मैं शुद्ध गुजराती पाता हूँ । केवल भाषाके प्रति थोड़ेसे अभिमानकी जरूरत है । इतना होनेपर पारसियोंकी गुजराती धीरे-धीरे सामान्य स्तरपर पहुँच जायेगी । [ गुजरातीसे ] नवजीवन, १४-८-१९२१ २६२. पत्र : ओंकारनाथ पुरोहितको पटना जाते हुए १५ अगस्त, १९२१ भाई ओंकारनाथ, आपका पत्र मीला । छपेला पत्र मैं भेजता हूं । उस पत्र में ऐसी कोई अनीतिमय बात नहि देखता हुं जिसलीये आपको अनीति प्रकट करनेके कारन खतको छापना चाहिये। उस खतको न प्रकट करनेकी प्रतिज्ञाका पालन करना हि चाहिये । उसमें दीइ हुई सलाहका पालन न करना या करना आपका हि हृदयपर निर्भर रहता है । ओंकारनाथ पुरोहित द्वारा / लाला चन्दूलाल राजाका बाजार आगरा मोहनदास गांधी गांधीजी के स्वाक्षरोंमें मूल पत्र ( जी० एन० ६०८८) की फोटो- नकलसे । १ व २. पारसी कवि । Gandhi Heritage Portal