५३६ सम्पूर्ण गांधी वाङ्मय मैं चाहता हूँ कि तुम अपनी सही परिस्थितिको समझो। मैं प्यारेलालको' क्यों रखे हुए हूँ, यह भेद तुम नहीं समझोगे । मेरी जिन्दगीके इस भागको तुम समझ नहीं सकोगे । बाका और मेरा स्वभाव एक नहीं है । बा मुझे नहीं समझती । आश्रममें अभी तक तो मुझे जैसी चाहिए वैसी एक भी स्त्री नहीं मिली । रसोई-घरके काम-काजको सँभालना [ विकट ] काम है । विरला ही उसे सँभाल सकता है । मैं उसे तुम्हारी शक्तिके बाहर मानता हूँ । उसके लिए तो फिलहाल मगनलाल, विनोबा, छोटेलाल, मैं और कुछ अंश में भुंवरजी ने अपनेको सिद्ध किया है। हमारा भोजन तो एक शास्त्र के अनुसार है । गोकीबेनको लेकर काफी परेशानियाँ थीं । हमें एक प्रौढ़ मनुष्यकी निश्चय ही आवश्यकता है। मैं अपनी समझमें प्यारेलालका अच्छेसे अच्छा उपयोग कर रहा हूँ । वक्त आनेपर मैं उसे अन्यत्र रख सकूंगा । जोजेफके बाहर रहते हुए तुम्हारा देवदास अथवा प्यारेलालको माँगना तो ज्यादती जान पड़ती है । तुम्हें इन दोनोंसे कुछ हलके दर्जेके व्यक्तिसे सन्तोष करना चाहिए। तुम प्रभुदासको रख सकते हो । दुर्गाके अच्छे हो जानेपर क्या तुम जोजेफके साथ रह सकते हो ? लेकिन यह तो दूरकी बात हुई। पहले तो मुझे तुम्हारी इच्छा ही जाननी है । मैं तुम्हें अभी 'यंग । इंडिया' में नहीं भेजूंगा। क्या तुम्हें मेरा पिछला पत्र मिला था ? फिलहाल तो मैं इसी तरह सोचता हूँ कि या तो तुम वहीं रहो या फिर मेरे साथ । तुम्हारे लेख पढ़े। सभी अच्छे हैं यानी उनपर कोई टीका-टिप्पणी जरूरी नहीं है । विपिनचन्द्रको' ठीक जवाब दिया गया है । मुझे गौहाटी लिखना । मैं २५ तक गौहाटीके आसपास रहूँगा । क्रिस्टोदास ' यंग इंडिया' के विचारसे साथ है। उसके आनेकी बात थी और वह आ गया है । वह मेरे साथ ही है । बापूके आशीर्वाद मूल गुजराती पत्र (एस० एन० ११४१३) की फोटो - नकलसे । १. प्यारेलाल नय्यर, १९२० में गांधीजीके साथ हुए और महादेव देसाईकी मृत्युके बाद उनके मुख्य सचिव बने । २. छोटेलाल जैन, सत्याग्रह आश्रमवासी । ३. सत्याग्रह आश्रमवासी । ४. गांधीजीकी बहन । ५. विपिनचन्द्र पाल । ६. कृष्णदास । Gandhi Heritage Portal
पृष्ठ:सम्पूर्ण गाँधी वांग्मय Sampurna Gandhi, vol. 20.pdf/५६८
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