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पृष्ठ:सम्पूर्ण गाँधी वांग्मय Sampurna Gandhi, vol. 20.pdf/५७३

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टिप्पणियाँ ५४१ हुआ है और हमें इतनी तालीम नहीं मिली है कि हम बहुत बड़े पैमानपर इस कामको उठा सकें । परन्तु जबतक हरएक जिला अपने लिए आवश्यक खादी तैयार न करने लगे तबतक ऐसी निगरानीकी तो निश्चय ही आवश्यकता है और सच्चे दिलसे जो- कुछ इसके लिए किया जा सकता है वह किया जाना चाहिए । लखनऊ के पाप-स्थान एक अंग्रेज मित्रने मुझे लखनऊसे लिखा है : मैं यह पत्र आपसे यह अनुरोध करते हुए लिख रहा हूँ कि आप यहाँसे जानेके पहले लखनऊ के वेश्यागृहोंके सम्बन्धमें यहाँके किसी अधिकारीको, जो आपके मतका समर्थक हो, कुछ लिख दें । आज सुबह में अमीनाबादमें फौजी पुलिस के सिपाहीसे बातचीत कर रहा था। उससे मालूम होता है कि उस तरफकी बस्ती में ऐसे कोई पचास मुकाम हैं, जहाँ यूरोपीय और एंग्लो-इंडियन सिपाही अक्सर जाया करते हैं । (इनमें से कुछ लोग फौजी अदालतोंमें पेश भी किये जा चुके हैं, क्योंकि उस बस्ती में फौजियोंका जाना मना है)। उसने हिन्दुस्तानियोंके विषयमें कुछ नहीं कहा; परन्तु मुझे बादमें किसीने बताया कि वे भी उन स्त्रियोंके यहाँ जाते हैं। मनुष्यके इस अधःपतन और असंयमके सम्बन्धमें आप यदि कुछ शब्द लिख देंगे तो वह इस बुराईको दूर करने में अन्य सब बातोंसे अधिक कारगर होगा । मैं प्रतिज्ञा करता हूँ कि इस काममें जितनी सहायता मुझसे हो सकती है, मैं करूँगा । मैं चाहता हूँ कि मैं भी इन अंग्रेज मित्रकी तरह विश्वास कर सकता कि मेरे शब्दोंमें वह प्रभाव है, जो उन्होंने बताया है । इन पंक्तियोंको लिखते समय बार-बार मेरी आँखोंके सामने उन प्यारी बहनोंका चित्र आता है जो मुझसे रातके समय कोको- नाडामें मिली थीं। जब मुझे उनकी लज्जाजनक स्थितिका हाल मालूम हुआ तब वे तो मुझे और भी प्यारी लगने लगीं । वे केवल संकेतसे मुझे अपने जीवनकी दशा बता सकी थीं। जो स्त्री उनकी तरफसे मुझसे बात कर रही थी उसकी आँखोंमें लज्जा और दुःख अंकित था । मैं उन्हें दोषी कहनेके लिए तैयार न हो सका। इस मुलाकातके बाद मैंने ' व्यक्तिगत चरित्र-शुद्धि' की आवश्यकतापर ही भाषण दिया । इसलिए आज मेरे हृदयमें लखनऊकी इन पतित बह्नोंके प्रति सहानुभूति उत्पन्न होती है । वे ऐसा लज्जा- जनक जीवन बितानेके लिए मजबूर की गई हैं। मुझे यकीन हो गया है कि वे अपनी खुशीसे ऐसा जीवन स्वीकार नहीं करतीं। यह तो मनुष्यकी पशुवृत्ति है जिसने इस घृणित कुकर्मको एक 'धन कमानेका धन्धा' बना दिया है । लखनऊ अपनी आराम- तलबीके लिए मशहूर है । परन्तु वह एक मुसलमान औलियाका भी स्थान है । इस्लाममें जो कुछ भी उत्कृष्ट व महान् है वह सब लखनऊमें है । हिन्दुओंके लिए तो लखनऊ उस प्रान्तका सदर मुकाम है जो सती सीता और रामकी पुण्यभूमि थी । वह हिन्दुओं- की पवित्रता, उदात्तता, शौर्य और सत्यपरायणताके श्रेष्ठ युगकी याद दिलाता है । Gandhi Heritage Portal