५५६ सम्पूर्ण गांधी वाङ्मय चरखे बनवाये जायें और वे कतैयोंको उधार दिये जायें । २७ और चरखे बने, जिसकी वजहसे अकाल के कारण निठल्ले बैठे हुए स्थानीय बढ़इयोंको काम मिल गया। इनमें से एक बढ़ईने चरखेमें कुछ सुधार करके उसे महीन सूत कातनेके लिए अपेक्षाकृत अधिक हलका और उपादेय बना दिया । चरखोंकी कीमत उनकी अच्छाईके अनुसार ३ रु० से लेकर ४ रु० तक यानी तीन, साढ़े तीन और चार रुपये अदा की गई । ऐसे तीन चरखे साढ़े नौ रुपये में बिके। इन चरखोंपर कुल मिलाकर १०३ रुपये ८ आने व्यय हुए । इस राशिमें चरखोंके निमित्त श्रीमती पेटिट द्वारा कृपापूर्वक भेजा गया रुपया भी शामिल है । इस काम के लिए स्थानीय रुई मुहैया तो कर ली गई थी परन्तु वह नौसिखुओंके लिए बिलकुल अनुपयुक्त सिद्ध हुई । इसलिए स्थानीय कपासकी किस्मको कुछ बढ़िया बनाने का एक नया तरीका काममें लाया गया। इसके परिणामस्वरूप न सिर्फ काममें मदद मिली बल्कि कुछ और कतैयोंको काम भी मिलने लगा । कच्ची कपास ली गई और ओटाईसे पूर्व उसमें से पत्तियाँ और गर्द इत्यादि सावधानीसे अलग की जाने लगी । इस काम के लिए मजदूरीकी दर एक पैसा प्रति पौंड निश्चित की गई। कोई भी वृद्धा स्त्री प्रतिदिन ४ पौंड कपास साफ करके दिन में एक आना कमा सकती थी । कपासकी सफाईके बाद उसे ओटा जाता था, और ओटाईकी दर प्रति दस पौंड एक आना तय हुई। इस प्रकार प्रत्येक स्त्री ढाई आने रोज कमा सकती थी । इस प्रकार ओटी हुई कपास धुनिये द्वारा १ आना प्रति पौंडकी दरसे साफ की जाती थी । वह लगभग आठ आने रोज कमा लेता था। अगर रुई मिलोंसे खरीद ली जाती तो ज्यादा अच्छा होता और आसान भी । परन्तु चूंकि ऐसी स्थानीय कपासकी सफाई के कामसे कुछ लोगोंको काम मिल जाता था, इसलिए इसे जारी रखना ठीक समझा गया । रुईकी सफाई के काममें जो उजरत दी जाती थी उसका अधिकांश ओटाईमें निकले बिनौलोंकी बिक्रीसे वसूल हो जाता है। निम्नलिखित आँकड़ोंसे विदित होगा कि ६० पौंड कपासको खरीदने व उसको अन्तिम रूपमें लाने के सम्बन्ध में कितना खर्चा पड़ता है । २० रुपये फी पटिया (२४० पौंड) की दरसे ६० पौंड कपासकी कीमत रुईसे गर्दै, सूखी पत्तियाँ आदिको निकलवाई १ पैसा फी पौंडकी दरसे ५२ पौंड साफ कपासकी ओटाई १ आना प्रति १० पौंडके हिसाब से धुनिये द्वारा लिंट (१७ पौंड) की साफ कराई एक आना प्रति पौंडकी दरसे रु०आ०पा० ५-०-० ०-१५-० ०-५-३ १-१-० ३५ पौंड बिनौलोंकी कीमत २० पौंड प्रति रुपये के हिसाब से घटाई कुल ७-५-३ १-१२-० १७ पौंड साफ रुईकी वास्तविक कीमत ५-९-३ इस प्रकार एक पौंड रुईकी कीमत ५ आने ३ पाई बैठती है । ६० पौंड कपासमें ८ पौंड कचरा निकलना ज्यादा माना जायेगा और इसे अच्छी और बढ़िया किस्मकी कपासका इस्तेमाल करके कम किया जा सकता है । Gandhi Heritage Portal
पृष्ठ:सम्पूर्ण गाँधी वांग्मय Sampurna Gandhi, vol. 20.pdf/५८८
दिखावट