परिशिष्ट ५६१ की एक विज्ञप्तिका प्रकाशित किया जाना आवश्यक हो जायेगा कि इस सम्बन्ध में सरकारने क्या रुख अख्तियार किया है । परन्तु इस सब कार्य में सौदेबाजीकी भावना नहीं है। श्री गांधीने यहाँतक कहा कि मुकदमा चलाया जाये चाहे न चलाया जाये, मेरा यह कर्त्तव्य हो जायेगा कि मैं [ इस वक्तव्य ] के कुछ अंश उन्हें दिखाऊँ और उसके उपरान्त उन्हींकी आबरू तथा उद्देश्यकी खातिर उन दोनोंसे यह कहूँ कि आप लोग सार्वजनिक रूपसे खेद प्रकट कीजिए । वार्तालापके पूरे दौर में वाइसराय महोदय तथा श्री गांधी, दोनों ही के दिलोंमें यह इच्छा काम कर रही थी कि मुकदमा चलाये जानेपर गड़बड़ न मच पाये और उनकी यह भी ख्वाहिश थी कि भविष्य में हिंसाको प्रोत्साहन देनेवाले भाषण न दिये जायें । वाइसरायने श्री गांधीको सूचित किया कि अगर वह वक्तव्य यथाशीघ्र प्रकाशित नहीं कर दिया जायेगा तो मैं मुकदमा चलाया जाना रुकवा न सकूंगा । इन भाषणोंकी बहुत चर्चा भारतमें ही नहीं बल्कि इंग्लैंडमें भी हुई थी। श्री गांधीने वक्तव्यको अविलम्ब प्रकाशित करना स्वीकार कर लिया । इसके बाद श्री गांधी शिमलासे रवाना हो गये, और उन्होंने कुछ दिनोंके अन्दर वाइसरायको इस आशयका तार भेजा कि श्री शौकत अली और श्री मुहम्मद अलीने वक्तव्यपर हस्ताक्षर कर दिये हैं, और उसमें बहुत मामूलीसा रद्दोबदल किया गया है । वह समाचारपत्रोंको प्रकाशनार्थ भेज दिया गया है। परिवर्तन निम्नलिखित था : श्री गांधी द्वारा तैयार किये गये मसविदेमें जहाँ ये शब्द लिखे हैं " हम कहना चाहते हैं कि हमारा मंशा हिंसाको प्रोत्साहित करना कदापि न था, परन्तु हम मानते हैं कि हमारे भाषणोंमें कुछ वाक्य ऐसे जरूर हैं जिनका वही अर्थ निकल सकता है जो लगाया गया है", श्री शौकत अली तथा श्री मुहम्मद अलीने ये शब्द लिख दिये : "हम कहना चाहते हैं कि हमारा मंशा हिंसाको उकसानेका कदापि न था, और हमने कभी यह सोचा भी न था कि हमारे भाषणोंमें कोई वाक्य ऐसा भी हो सकता है जिनसे वह अर्थ निकलता हो जो किया गया है परन्तु हम अपने मित्रकी दलीलके जोरको और उनके द्वारा लगाये गये अर्थको तसलीम करते हैं । वक्तव्य के प्रकाशित हो जाने के पश्चात् सरकारी विज्ञप्ति प्रकाशित की गई । उस विज्ञप्ति में क्या-क्या शर्तें होंगी इसका निर्णय ठीक-ठीक तबतक न हो पाया जबतक वह प्रकाशनकी तिथिके समीप न पहुँच गई। श्री गांधी उसे नहीं देख पाये; हाँ, यह जरूर था कि उसका सार जैसा कि ऊपर लिखा जा चुका है श्री गांधीको बतला दिया गया था। वाइसराय और श्री गांधी के बीच हुई मुलाकातोंका मुख्य भाग उस वार्ता- लापमें बीता जो भारतमें फैले असन्तोषसे सम्बन्धित था और जिसमें पंजाबके उपद्रव, खिलाफत आन्दोलन, सेवरकी सन्धि तथा जनताकी आम हालत - • ये चीजें शामिल थीं। श्री गांधीने वाइसराय के सम्मुख स्वराज्यकी कोई योजना पेश नहीं की थी और न उक्त मुलाकातों में ऐसी किसी योजनापर बातचीत ही हुई थी । [ अंग्रेजीसे ] यंग इंडिया, ४-८-१९२१ २०-३६ Gandhi Heritage Portal
पृष्ठ:सम्पूर्ण गाँधी वांग्मय Sampurna Gandhi, vol. 20.pdf/५९३
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