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पृष्ठ:सम्पूर्ण गाँधी वांग्मय Sampurna Gandhi, vol. 21.pdf/२२५

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भेंट : 'देशाभिमानी' के सम्पादकको १९५ प्रकार ऐसी परिस्थितियोंमें हमारा मन्दिरोंमें प्रवेश पानेका आन्दोलन चल रहा है। अब इस सम्बन्धमें आपकी क्या सलाह है ? मैं तो आपको सविनय अवज्ञा करनेकी सलाह दूंगा। आपको मन्दिरोंमें प्रवेश करना चाहिए, और यदि कानून इसके खिलाफ हो तो खुशी-खुशी गिरफ्तार हो जाना चाहिए। धर्मके आधारपर आपको मन्दिरोंमें प्रवेश करनेसे रोकना गलत है। आपको निष्ठाके साथ अहिंसा धर्मपर डटे रहना चाहिए। सामूहिक रूपसे मन्दिरोंमें प्रवेश नहीं करना चाहिए। अकेले-अकेले जाकर यह काम कीजिए। और आपको बहुत कठोर आत्म-संयमसे भी काम लेना होगा । इस मामलेमें कांग्रेसका रवैया क्या है ? ... शंकर मेननके' अध्यक्षीय भाषणका सार तो यह था कि वे यह कहने की स्थितिमें नहीं थे कि कांग्रेसके अधिकारियोंसे सलाह लिये बिना कांग्रेस कमेटी इस सवालको हाथमें ले सकती है या नहीं । अगर श्री शंकर मेननने ऐसा कहा कि कांग्रेस कमेटी मन्दिरोंमें प्रवेशका प्रश्न अपने हाथमें नहीं ले सकती तो उन्होंने गलत कहा । एक श्रोताने पास ही बैठे एक सज्जनकी ओर इशारा करके कहा, "यह आदमी भी नाडार है । टी० के० माघवन : मलाबारके समाजमें हमारी स्थिति भी हर तरहसे वैसी ही जैसी कि तमिल समाजमें नाडारोंकी है। श्रोता: हमारे जिलेमें भी कांग्रेस कमेटीके सामने यही कठिनाई है । यहाँके अधिकांश लोगोंको नाडारोंके मन्दिरोंमें प्रवेश करनेपर आपत्ति । आपको इसकी चिन्ता नहीं करनी चाहिए कि इसके बारेमें अधिकांश लोग क्या सोचते हैं। क्या आप सिर्फ इसी कारणसे अपने सिद्धान्त छोड़ देंगे कि अधिकांश लोग आपके विरुद्ध हैं ? टी० के० माधवन : क्या आप इस विषयपर त्रावणकोरकी कांग्रेस कमेटीको लिखनेको कृपा करेंगे ? हाँ, हाँ, बड़ी खुशीसे; किसको लिखना होगा ? मेरा खयाल है, अच्छा हो, आप श्री सी० शंकर मेनन, बी० ए०, बी० एल० को लिखें। हाँ, लिखूंगा । क्या आप जाति प्रथाके पक्षमें हैं ? हाँ, हूँ । क्या आप रोटी-बेटीके सम्बन्धके पक्षमें हैं ? इन दोनों ही मामलोंमें जाति-प्रथाका समर्थन में स्वास्थ्य सम्बन्धी कारणों और आध्यात्मिक कारणोंसे करता हूँ । खाना उतना ही गंदा काम है, जितना शौच आदि करना । फर्क सिर्फ इतना है कि शौच करने से शरीरको आराम मिलता है। जिस कढ़ी के १. विद्वान् वकील, क्विलन कांग्रेस कमेटीके अध्यक्ष । Gandhi Heritage Portal