४. जहाँ राजकुमारके लिए कोई समारोह हो रहा हो, उस दिशामें कोई भूलचूकसे, कौतूहलवश भी, न जाये ।
५. घरमें बैठकर सूत कातें और अगर न आता हो तो आठ घंटे शान्त चित्त किसीके पास बैठकर सीख ले ।
६. प्रत्येक व्यक्ति अधिक नहीं तो थोड़ा समय भगवत् भजन अथवा बन्दगीमें अवश्य व्यतीत करे। शहरके लोग ऐसा न समझें कि ईश्वर तो कहीं है ही नहीं अथवा है तो भी राष्ट्रके कार्य में उसका नाम अथवा मदद माँगने की कोई जरूरत नहीं है ।
७. राजकुमारके उतरनेका जो समय निर्धारित किया गया हो उसी समय एल्फिन्स्टन रोडके पासवाले मैदानमें आप लोग विदेशी कपड़ोंकी होली करें; होली करनेके लिए जहाँ-जहाँसे विदेशी कपड़े इकट्ठे न किये गये हों वहाँ-वहाँसे उन्हें इकट्ठा किया जाये ।
८. चलती गाड़ी आदिसे किसीको बलपूर्वक न उतारें ।
९. मजदूर या नौकरियाँ करनेवाले दूसरे लोग छुट्टीके बिना काम बन्द न करें ।
१०. प्रत्येक कार्यमें मनुष्यको अपनी इच्छाके अनुसार व्यवहार करनेकी छूट हो, तभी हममें स्वराज्यकी योग्यता आयेगी । याद रखिए :
राजकुमारके स्वागतार्थ किये जानेवाले समारोहोंमें हम भाग नहीं लेनेवाले हैं, उसका कारण हमें उनसे कोई व्यक्तिगत द्वेषभाव है सो नहीं; उन्होंने हमें कोई नुकसान नहीं पहुँचाया है । उसका कारण यह है कि नौकरशाही उनका जो दुरुपयोग कर रही है उससे हमें अलग रहना है। अतएव एक ओर जहाँ हमारा कर्त्तव्य स्वागत सम्मानका बहिष्कार करना है वहाँ दूसरी ओर हमारा यह भी कर्त्तव्य है कि हम अपनेको जोखिममें डालकर भी युवराजके शरीरकी रक्षा करें; हमें ऐसा कुछ नहीं करना है जिससे उनका किंचित भी अपमान होता हो ।
मोहनदास करमचन्द गांधी
गुजराती, २०-११-१९२१