४६६ सम्पूर्ण गांधी वाङ्मय समुद्र पारसे कराचीके मुकदमोंकी समुद्र-पारके देशोंमें भी कितनी सराहना की गई है, यह ट्रान्सवाल ब्रिटिश भारतीय संघके अध्यक्ष, श्री अस्वातके अभी-अभी मिले इस तारसे मालूम होगा : अली-बन्धुओं, डा० किचलू और मातृभूमिके निमित्त जेल जानेवाले अन्य लोगोंके परिवारोंको सारी बिरादरीकी हार्दिक बधाइयाँ । ईश्वरसे प्रार्थना है कि आन्दोलन सफल हो । हमें अपने भारतसे बाहर रहनेवाले देशवासियोंकी ओरसे इस तरहके जो अनेक तार या पत्र प्राप्त हुए हैं मैंने यहाँ उनमें से केवल एक तार ही छापा है । अमेरिकामें बसे हुए हमारे देशवासी भी देशके इस कार्यमें सक्रिय सहायता दे रहे हैं। हाल ही में न्यूयार्कसे दो तार प्राप्त हुए हैं। उनमें से आखिर में मिले तारको मैं यहाँ देता हूँ: एक हजार अमेरिकियोंकी खुले मैदान में की गई सभाका अभिनन्दन स्वीकार करें। हम सविनय अवज्ञा आन्दोलनको सफलताको कामना करते हैं । सुदूर पश्चिममें रहनेवाले सभी युवक छात्रों व अन्य लोगोंसे मैं दो शब्द कहना चाहता हूँ। वे देशकी सबसे अधिक सेवा इस प्रकार कर सकते हैं कि वे इस आन्दोलनकी व्याख्या उसके यथार्थ रूपमें और पूर्वके अर्थोंमें करें, वे इसकी पाश्चात्य मिसालें खोजने और इसे पाश्चात्य रंग देनेकी कोशिश न करें। मेरा यह विश्वास है कि इसके वर्तमान रूपकी कोई मिसाल नहीं है। इसकी कल्पना प्राच्य बल्कि उससे भी अधिक भारतीय है और वह भारतकी स्थितियोंमें विशेष रूपसे उपयुक्त है। अभी यह कुछ कहा नहीं जा सकता कि जब इसकी जड़ें इतनी गहरी पहुँच जायेंगी कि अपनी शाखाएँ पश्चिममें फैला सकेँ तब आधुनिक दौड़में लगा पश्चिम इसको किस रूपमें अपनायेगा । अभी तो यह अपनी शैशवावस्थामें है और रूपरंगमें प्रायः पाश्चात्य दिखता है। दुर्भाग्यसे यह स्वीकार करना पड़ता है कि अभीतक इसका रूप बहुतोंको केवल विनाशात्मक दिखता है और वे उसे इसी रूपमें ग्रहण करते हैं। यद्यपि इसका यह विनाशात्मक रूप नितान्त आवश्यक फिर भी इसका स्थायी और सर्वश्रेष्ठ भाग तो रचनात्मक ही है । मैं इस तथ्यसे अभिज्ञ हूँ और मुझे इससे बहुत दुःख होता है कि बहुतसे लोगोंको यह असहयोग आन्दोलन केवल हिंसाकी तैयारी मात्र लगता है; जबकि अहिंसा इसका केवल अभिन्न अंग ही नहीं है बल्कि एकमात्र पोषक अंग है । यह स्वयं निर्माणका सबसे बड़ा भाग है । साथ ही अहिंसा इसको एक धार्मिक आन्दोलनका रूप दे देती है और मनुष्यको केवल ईश्वरपर आश्रित बना देती है । अहिंसा द्वारा असहयोगी दृढ़तासे अपने मार्गपर डटा रहता है और सभी अवस्थाओं में धीर गतिसे आगे बढ़ता है। अहिंसा द्वारा असहयोगी अपने सिरजनहारके सामने नग्न रूपमें आ जाता है और दिव्य सहायता प्राप्त कर लेता है । वह उसके सम्मुख एक हाथमें 'बाइबिल, ' 'कुरान' या 'गीता' लेकर और दूसरे में बन्दूक लेकर उपस्थित नहीं हो सकता । इसके विपरीत वह उसके महान धवल सिंहासन के Gandhi Heritage Portal
पृष्ठ:सम्पूर्ण गाँधी वांग्मय Sampurna Gandhi, vol. 21.pdf/४९८
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