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पृष्ठ:सम्पूर्ण गाँधी वांग्मय Sampurna Gandhi, vol. 21.pdf/५०५

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गाली किसे कहते हैं ? ४७३ कोई बल-पूर्वक नहीं करेगा । ऐसे लोग सविनय कानून भंगके लायक नहीं हैं । सविनय कानून-भंगमें तो यह पहलेसे मान लिया जाता है कि लोग उन तमाम कानून-कायदोंको, जो नीतिके विरुद्ध नहीं हैं, स्वेच्छापूर्वक ठीक तरहसे मानेंगे। उस दीक्षान्त समारोहके व्यवस्थापकोंके बनाये नियमकी तरहके सार्वजनिक संस्थाओंके कानून-कायदोंको मानना, राज्यके काननोंको स्वेच्छापूर्वक बिना दरेग माननेकी पहली सीढ़ीके सिवा और कुछ नहीं है । अविचारपूर्वक अवज्ञा करनेका अर्थ है समाजको छिन्न-भिन्न कर देना । अतः जो लोग सविनय कानून-भंग की आकांक्षा रखते हों उनका पहला काम यह है कि वे सार्वजनिक संस्थाओंके, कांग्रेस अधिवेशनों, सम्मेलनों तथा दूसरी सभा समितियों के, कानून-कायदोंको बखुशी माननेकी कला सीखें। इसी प्रकार वे राज्य के कानूनोंको भी मानना सीखें, फिर चाहे वे उन्हें पसन्द करते हों चाहे न करते हों । सविनय कानून-भंगकी अवस्था अराजकता और मनमानीकी अवस्था नहीं है; बल्कि उसमें कानूनको माननेकी प्रवृत्ति और साथ ही आत्मसंयमका अन्तर्भाव पहले ही से गृहीत माना जाता है | [ अंग्रेजीसे ] यंग इंडिया, १७-११-१९२१ १९२. गाली किसे कहते हैं ? संयुक्त प्रान्तसे एक महोदय लिखते हैं- . . आजकल चारों तरफ बड़ी बुलन्द आवाजोंमें सरकारकी मलामत करनेकी बाढ़-सी आ रही है। ऐसा मालूम होता है कि मानो हर आदमी इस बातकी कोशिश करता है कि सरकारको गालियाँ देनेमें में दूसरे लोगोंसे आगे किस तरह बढ़ जाऊँ । सच पूछिये तो हरएक व्याख्यान बदजबानी और गालियोंसे भरा रहता है। . . . मुझे तो ऐसी बुरी बातसे बहुत नफरत होती है। . . मेरी दृष्टिमें हिंसा केवल दूसरोंपर प्रत्यक्ष हमला करने और उन्हें मार डालनेमें ही नहीं है; बल्कि बुरी बात मुंहसे निकालना भी हिंसाके अन्तर्गत आता है । अगर यह ठीक है तो मेरी समझमें नहीं आता कि आप खुद जो इस सरकारको 'शैतानी', 'राक्षसी' और 'बर्बर' की उपाधियाँ देते हैं उसका समर्थन कैसे किया जा सकता है। इस बातमें रत्ती भर भी शक नहीं है कि इन शब्दों का समावेश हिंसा में होता है; परन्तु इस बातका स्वप्न में भी खयाल नहीं किया जा सकता कि आप अहिंसा के परम प्रचारक होकर भी हिंसापूर्ण शब्दोंका प्रयोग करेंगे । यह तो गाली-गलौजकी बात हुई। अब में एक दूसरे सवालको लेता हूँ । आप हमेशा कहते हैं कि मैं और मेरे साथी लोग तो अंग्रेजी सरकारके खिलाफ Gandhi Heritage Portal