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पृष्ठ:सम्पूर्ण गाँधी वांग्मय Sampurna Gandhi, vol. 21.pdf/५०६

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४७४ सम्पूर्ण गांधी वाङ्मय लड़नेके लिए खड़े हुए हैं, अंग्रेजोंके खिलाफ नहीं । आप इस शासन-प्रणालीके तो विरोधी हैं और इसे सुधारना या मिटाना चाहते हैं परन्तु खुद अंग्रेजोंके प्रति आपके दिलमें किसी तरहका बुरा खयाल नहीं है । अतः इससे यह साफ ही कि यद्यपि आप इस शासन-पद्धतिको तो मटियामेट कर देना चाहते हैं, परन्तु अंग्रेजोंको निकालना नहीं चाहते। अगर यह बात ठीक है तो यह ऊँचा सिद्धान्त अभी उन लोगोंके हृदयमें भी पूरी तरह अंकित नहीं हुआ है जो आपके सच्चे अनुयायी होनेका दम भरते हैं। में इसकी एक मिसाल देता हूँ। आगरामें अभी हालमें राजनैतिक परिषद हुई थी। उसमें पण्डित जवाहरलाल नेहरूका भाषण हुआ, जिसमें उन्होंने विदेशी कपड़के बहिष्कारपर बोलते हुए कहा : "मैं उन लोगों में से हूँ जो सच्चे दिलसे अंग्रेजोंको भारतसे निकालना चाहते हैं और अगर मुझे इसका कोई उपाय हाथ लगा है तो वह है स्वदेशी।" यह बात अखबारोंमें भी प्रकाशित हो चुकी है और, में समझता हूँ, शायद आपने भी पढ़ी होगी। ऐसी हालतमें यह कैसे कहा जा सकता है कि पण्डित जवाहरलाल नेहरूने आपके उस सिद्धान्तका मर्म समझ लिया है जिसके द्वारा हम मनुष्य और उसके कार्यमें भेद कर सकते हैं, ताकि हम उसके कार्यकी तो निन्दा कर सकें; परन्तु स्वयं उसके प्रति हमारे मनमें किसी तरहका दुर्भाव न आये ? इस मामलेमें तो मैं जोर देकर यह कह सकता हूँ कि नेहरूजीकी बात किसी तरह भी वाजिब नहीं कही जा सकती; तथापि मैं यह जानना चाहता हूँ कि क्या आप उसे पसन्द करते हैं या नापसन्द । अगर असहयोगी लोग गालियोंका व्यवहार करते हैं तो वे निस्सन्देह हिंसा करते हैं और अहिंसाके व्रतका भंग करते हैं । लेकिन मैं इस बातको नहीं मान सकता कि हरएक भाषण में महज बदजबानी और बददुआएँ ही भरी रहती हैं। मैं लेखक महोदयको यकीन दिलाता हूँ कि भाषणोंमें क्या सरकारकी और क्या खुद हमारी दोनोंकी ही निन्दा होती है और उनमें निन्दाकी अपेक्षा अहिंसा, हिन्दू-मुस्लिम-एकता और स्वदेशी समर्थक दलीलें ही अधिक रहती हैं। और इन तीनों बातोंका लोगोंकी ओरसे जो इतना आश्चर्य- जनक उत्तर मिला है, वह मेरे इस कथनका शायद सबसे बड़ा सबूत है । फिर लोगोंने इतनी प्रगति विना प्रभावपूर्ण आग्रहके ही नहीं की है । लेकिन आखिर गाली कहते किसे हैं ? अंग्रेजीके कोषमें गालीके पर्यायवाची अंग्रेजी शब्दका अर्थ है -- अनुचित प्रयोग, कुप्रयोग, बुरा प्रयोग । अतः अगर हम चोरको चोर अथवा बदमाशको बदमाश कहते हैं तो इससे हम उसे गाली नहीं देते। हम कोढ़ीको कोढ़ी कहते हैं तो वह इसका बुरा नहीं मानता। हाँ, यह जरूर है कि ऐसे विशेषणों- का प्रयोग उसी नीयतसे किया जाना चाहिए और उनके प्रयोगकर्त्ताके पास उसकी यथार्थताका प्रमाण होना चाहिए। इस दशामें मैं हर जगह और हर मौकेपर किये गये १. जवाहरलाल नेहरूके उत्तरके लिए देखिए "टिप्पणियाँ ", ८-१२-१९२१ का उप-शीर्षक, " पण्डित जवाहरलाल नेहरूका जवाब " | Gandhi Heritage Portal