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पृष्ठ:सम्पूर्ण गाँधी वांग्मय Sampurna Gandhi, vol. 21.pdf/५३०

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४९८ सम्पूर्ण गांधी वाङ्मय होता है, इतना जीवन भरा होता है कि उसका असर लोगोंपर तुरन्त होता है । ऐसा सत्य मुझमें नहीं है। हाँ, इस मार्ग पर मैं चल अवश्य रहा हूँ । अतएव मेरी यह दशा रूख नहीं तेंह रेंड प्रधान" की तरह दीन है । ti सत्यमें प्रेम होता है । सत्यमें अहिंसा, ब्रह्मचर्य, अस्तेय आदिका समावेश हो जाता है । पाँच यम तो केवल सुविधाके लिए बताये गये हैं । सत्यको जान लेनेके बाद जो हिंसा करता है, वह सत्यका त्याग करता है । सत्यको जाननेके बाद जो व्यभिचार करता है वह तो मानो सूर्यके रहते हुए अंधेरेके अस्तित्वको मानता है । ऐसे शुद्ध सत्यका पूरी तरह पालन करनेवाला एक मनुष्य भी इस वर्षके अन्तके पहले निकल आये तो स्वराज्य मिले बिना नहीं रह सकता; क्योंकि उसका कहना सबको मानना ही पड़ेगा । सूर्यके प्रकाशको किसीके सामने सिद्ध नहीं करना पड़ता । सत्य स्वयं प्रकाशमान् और स्वयंसिद्ध है । ऐसा सत्याचरण इस विषम कालमें कठिन तो है पर असम्भव नहीं । यदि कुछ ही लोग कुछ ही अंशमें ऐसे सत्यके आग्रही हो जायें तो हम स्वराज्य प्राप्त कर लें और अगर कुछ लोग ऐसे सत्यके सख्त आग्रही हो जायें तो फिर कहना ही क्या है । पर हम सच्चे हों । सत्यके बदले सत्यका ढोंग काम नहीं दे सकता। भले ही रुपये में एक आना हों, पर हों हम सच्चे । इस थोड़े-बहुत सत्यमें भूले भटके, जान-अनजानमें वाणी के असत्यका किंचित् भी समावेश हरगिज न करें। मेरी तो यह महत्वाकांक्षा है कि इस धर्मयज्ञमें हम सब लोग सत्यका सेवन करनेवाले बनें । [ गुजरातीसे ] नवजीवन, २०-११-१९२१ २०४. रेवरेंड जे० केलॉकके' नाम नोट मौनवार, २१ नवम्बर, १९२१ मैं अंग्रेज मित्रोंको वहाँ जाने के लिए धन्यवाद देता हूँ। मैं उठता नहीं हूँ क्योंकि उठनेसे जोर पड़ता है । मेरी आकांक्षा है कि भले ही हमारे बीच अधिकसे-अधिक मतभेद हो किन्तु हम मित्रवत् रहें । अंग्रेजी प्रति (सी० डब्ल्यू० ४५०२) की फोटो - नकलसे । १. विल्सन कालेज, बम्बई के प्रोफेसर । २. विभिन्न जातियोंके एक सम्मिलित दलके सदस्योंकी हैसियतसे उपद्रवग्रस्त क्षेत्रोंमें विश्वास और शान्तिकी स्थापनाके लिए जानेके लिए । Gandhi Heritage Portal