५०० सम्पूर्ण गांधी वाङ्मय उपवास तोड़नेके लिए जोर न डालें । इस प्रकारके संयमको मैं सच्ची मित्रता की कसौटी मानूंगा । हिन्दुओं और मुसलमानोंपर मैं खास जिम्मेदारी डालता हूँ । उनमें से अधिकांश असहयोगी हैं। उन्होंने फिलहाल अहिंसाका धर्म स्वीकार कर लिया है। उनके पास बहुसंख्याकी शक्ति है । सरकारी सहायताके बिना भी, वे छोटे सम्प्रदायोंके विरोध के सामने टिके रह सकते हैं। इसलिए यदि वे छोटे सम्प्रदायोंके प्रति मैत्री और उदारताका भाव रखें तो सब ठीक हो जायेगा। मैं पारसियों, ईसाइयों और यहूदियोंसे प्रार्थना करूँगा कि वे भारतकी नई जागृतिको ध्यानमें रखें। हिन्दू-मुस्लिम मानव-समुद्र में उन्हें अनेक रंगोंका जल मिलेगा । किनारेपर उन्हें गदला जल दिखाई देगा । मैं उनसे आग्रह करूँगा कि उनके जो हिन्दू या मुसलमान पड़ौसी उनके प्रति दुर्व्यवहार करें उन्हें भी वे बर्दाश्त करें और उस दुर्व्यवहारकी सूचना अपने नेताओंके द्वारा तुरन्त हिन्दू और मुसलमान नेताओंको भेजें, ताकि उन्हें न्याय प्राप्त हो सके । वस्तुतः मैं यह आशा करता हूँ कि इस दुर्भाग्यपूर्ण कलहके फलस्वरूप सभी अन्तर्जातीय झगड़ोंके निपटारेके लिए एक महाजन नियुक्त कर दिया जायेगा । इस सभाका महत्व मेरे खयालमें इस बातमें है कि उसी एक ईश्वरके उपासक हम सब अपने मतभेदोंके बावजूद, इस निर्दोष भोजमें एक साथ शामिल हो सके हैं। हम आज इन मतभेदोंको कम करनेके उद्देश्यसे इकट्ठे नहीं हुए हैं, निश्चय ही हम अपने प्रिय सिद्धान्तोंमें से किसी एकको छोड़नेके लिए भी इकट्ठे नहीं हुए हैं । हम यहाँ इकट्ठे हुए हैं यह प्रदर्शित करनेके लिए कि हम, अपने सिद्धान्तोंके प्रति सच्चे रहते हुए भी, एक-दूसरे के प्रति दुर्भावनासे मुक्त रह सकते हैं । ईश्वर हमारे प्रयत्नको सफल बनाये । [ अंग्रेजीसे ] यंग इंडिया, २४-११-१९२१ २०६. साथी कार्यकर्त्ताओंसे २२ नवम्बर, १९२१ साथियो, ये पिछले कुछ दिन हमारी अग्नि परीक्षाके दिन थे, और हमें परमात्माको धन्यवाद देना चाहिए कि हममें से कितने ही लोग उसमें कच्चे नहीं साबित हुए। अभी बहुतसे लोग मेरे सामने हैं, जिनके सिर फोड़ दिये गये हैं । ये घायल लोग तथा जिन लोगोंकी लाशोंका हाल मैंने प्रामाणिक सूत्रसे सुना है, इस बातके यथेष्ट प्रमाण हैं । कई कार्य- कर्त्ताओंने शान्ति स्थापित करने तथा अपने सिरफिरे देशभाइयोंके कोपको शान्त करने के कार्यमें अपनी जानें गँवाई हैं, हाथ-पैर तुड़वाये हैं, और गहरी चोटें खाई हैं । ये मौतें और ये चोटें साबित करती हैं कि यद्यपि हमारे अनेक देशभाई भूल कर बैठे हैं, तथापि हममें कुछ लोग जरूर ऐसे हैं जो अपने लक्ष्यकी प्राप्तिके लिए प्राणतक न्यौछावर Gandhi Heritage Portal
पृष्ठ:सम्पूर्ण गाँधी वांग्मय Sampurna Gandhi, vol. 21.pdf/५३२
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