२१०. सन्देश : बम्बईके मिल मजदूरोंको' मिलमें काम करनेवाले बन्धुओ, [ २७ नवम्बर, १९२१ के पूर्व ] यह सच है कि मैं आपको व्यक्तिगत रूपसे नहीं जानता लेकिन समस्त हिन्दु- स्तान के मजदूरोंके लिए मैं मजदूर बना हूँ । इसलिए आपके साथ मेरा निकटका सम्बन्ध है । मेरी इच्छा है कि आप सब मिलोंके खुलते ही तुरन्त कामपर जायें और फिर कभी मालिकोंके छुट्टी दिये बिना कामसे अलग न रहें और न किसी भी उपद्रवमें भाग लें। [ गुजरातीसे ] आपका हितैषी, मोहनदास करमचन्द गांधी गुजराती, २७-११-१९२१ २११. उदार दलवालोंके नाम [ २७ नवम्बर, १९२१] मित्रो, हम सब दूसरी बातोंमें इतने व्यस्त हैं कि मलाबारकी घटनाओंपर शायद ही उतना ध्यान दे रहे हों जितना कि देना चाहिए। इस झगड़ेको खत्म करना बहुत ही जरूरी हो गया है। यह सीधा-सादा मानवीयताका प्रश्न है । मोपला लोग चाहे कितने भी बुरे हों, पर उनके साथ मानवीयताका बर्ताव होना चाहिए। उनके बीवी-बच्चोंके साथ हमारी सहानुभूति होनी चाहिए। सबके सब वे बुरे भी नहीं हैं। फिर भी इसमें सन्देह नहीं कि बहुत-से निर्दोष व्यक्ति भी अपराधी मान लिये गये होंगे । जबर्दस्ती धर्म- परिवर्तन एक भयानक चीज है । परन्तु मोपलोंकी वीरताकी हमें सराहना करनी चाहिए । ये मलाबारी इसीलिए नहीं लड़ते कि लड़ाईसे इन्हें प्रेम है । ये उस चीजके लिए लड़ रहे जिसे ये अपना धर्म समझते हैं, और जिस ढंगसे लड़ रहे हैं उसे भी ये धार्मिक समझते हैं । इनकी भारी बहुसंख्याको अपना प्रतिरोध जारी रखनेसे कोई व्यक्तिगत लाभ नहीं होगा । इनका अपराध ऐसा नहीं है जो जान-बूझकर किया गया हो, बल्कि उसका कारण इनका अज्ञान ही है । १. बम्बईके मिल मजदूरोंके क्षेत्रमें एक पर्चे के रूपमें वितरित । २. यह " मोपलोंके बारेमें " शीर्षकसे इसी तिथिको प्रकाशित किया गया था । Gandhi Heritage Portal
पृष्ठ:सम्पूर्ण गाँधी वांग्मय Sampurna Gandhi, vol. 21.pdf/५४४
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