टिप्पणियाँ ५२७ संख्यक जातियोंके स्वत्वोंकी रक्षा सबसे पहले करनी चाहिए । यहाँतक कि एक बच्चा भी अपनी राय बेरोक-टोक प्रकट कर सके । बहुमतका शासन अल्पसंख्यक जातियोंको कुचलने के काम में लाया जाये तो यह बर्बरता है । स्वतन्त्र भारतमें हम यह नहीं चाहते कि लोग दबकर समान रूप हो जायें । यह तो निर्जीव समानता होगी। हम तो यह चाहते हैं कि लोग अपनी जुदा-जुदा रायें रखें, उनके व्यवहारमें भी भिन्नता रहे, परन्तु उनमें बोलबाला उसीका हो जिसकी बात सबसे अच्छी और लाभदायक हो; सो भी लाठी के बलपर नहीं, बल्कि न्यायके बलपर । सत्ताके भारके नीचे तो हम बहुत दिनोंसे कराह रहे हैं; और बहुसंख्यक लोगोंके दबावमें उतनी ही पशुता हो सकती है जितनी कि अल्पसंख्यक लोगोंकी गोलियोंमें है । अतएव यदि हम आजाद होना चाहते हों, तो हमें अपने पारसी और ईसाई- भाइयोंके साथ धीरजसे पेश आनेकी जरूरत है । पारसियों और ईसाइयोंके सम्बन्धमें जो अन्ध दुर्भाव दिखाई देता है, वह तो मुझे खुद हिन्दू-मुस्लिम एकताके लिए भी हानिकारक मालूम होता है। यदि हम पारसियों, या ईसाइयोंके मतभेद आदिको सहन नहीं कर सकते तो इस बातका क्या इत्मीनान है कि हिन्दू भी, जब वे पाशविक शक्तिमें अपनेको बढ़कर पायेंगे तब, अल्पसंख्यक मुसलमानोंपर अपनी इच्छा न थोप देंगे, या जब मुसलमान अपनेको अपेक्षाकृत अधिक पशु-बलका प्रयोग करनेकी अवस्थामें पायेंगे तब वे कमजोर हिन्दुओंको, उनकी संख्या अधिक होनेपर भी, न धर दबायेंगे ? बंगालसे आई एक प्रतिध्वनि बंगालसे एक मित्रने पत्र लिखा है । पत्र - प्रेषक महाशय इस विषयके जानकार हैं। वे कहते हैं : मैं आपसे यह कह देना चाहता हूँ कि यदि पूर्वी बंगालमें सविनय अवज्ञा शुरू हुई तो इसका नतीजा और भी ज्यादा बुरा होगा। वहाँ मुसलमानोंकी तादाद ७० फी सदीसे भी ज्यादा है। उनमें ज्यादातर लोग हुल्लड़बाज हैं । जहाँ ये लोग जोशपर चढ़ कि हिन्दुओंपर टूट पड़ेंगे, बड़ा जोरोजुल्म कर बैठेंगे और हिन्दू जमींदारों और सेठ साहूकारोंको आतंकित कर देंगे। उनमें जो समझदार और शरीफ लोग हैं, वे उनको काबूमें न रख सकेंगे। हिन्दू-मुस्लिम एकता जरा-से धक्केसे भरभरा जायेगी। कलकत्तामें भी हालत बहुत ही खराब हो जायेगी । में आपसे सच्चे दिलसे अनुरोध करता हूँ कि आप हिन्दुस्तानके लोगोंसे और यहाँके हालातके बारेमें बहुत ज्यादा उम्मीद न रखें। आप दक्षिण आफ्रिकाकी परिस्थितियों और वहाँके लोगोंको जितना अधिक पहचानते हैं उतना इस भारतभूमि और यहाँके लोगोंको नहीं पहचानते । इस स्पष्टोक्ति के लिए मुझे माफ कीजिएगा। अभी आप सविनय अवज्ञा शुरू करनेके खिलाफ जान पड़ते हैं। पर यदि आपने अपना इरादा बदल दिया, तो मुझे इसके सिवा दूसरा नतीजा नहीं दिखाई देता कि चारों ओर भय और आतंक छा जायेगा । आपके उच्चतम आदर्श चौपट हो जायेंगे और देश और भी अधिक उत्पीड़न और Gandhi Heritage Portal
पृष्ठ:सम्पूर्ण गाँधी वांग्मय Sampurna Gandhi, vol. 21.pdf/५५९
दिखावट