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पृष्ठ:सम्पूर्ण गाँधी वांग्मय Sampurna Gandhi, vol. 21.pdf/५६३

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टिप्पणियाँ ५३१ हुआ हो या जिसे लाभ पहुँचा हो, कोई उपयुक्त कार्य नहीं होगा । मेरा एक लघु उद्देश्य एक प्रणालीके रूपमें सरकारको, और इसलिए उसके प्रशासकोंकी प्रतिष्ठाको, चोट पहुँचाना भी है । लेकिन मैं यह काम पूरी तरह अहिंसात्मक रहकर और हर सम्भव व अहिंसात्मक तरीकेसे उससे कोई सम्पर्क न रखकर तथा दूसरोंको भी ऐसा ही करनेके लिए प्रेरित करके करता हूँ । वस्तुतः यदि अहिंसा सरकार और जनता दोनोंका समान धर्म बन जाये, तो किसी भी झगड़ेकी कतई गुंजाइश नहीं रहेगी और तब असह्योगका प्रश्न ही नहीं उठेगा । कुछ और उल्लेखनीय व्यक्ति जेलम मौलाना शरर मद्रास अहातेके एक प्रभावशाली वक्ता और खिलाफत के कट्टर कार्यकर्त्ता हैं । वे एक अच्छे लेखक भी हैं । मद्रास सरकारने उनकी आवाज एक सालके लिए बन्द कर दी है। पंजाब सरकारने पण्डित नेकीराम शर्माको गिरफ्तार कर लिया है । बम्बईकी जनता उनसे अपरिचित नहीं है । १७ तारीखको जब भिण्डी बाजारमें शराबकी एक दुकान जलाकर खाक कर दी गई थी तब उन्होंने कई जानें बचाई थीं । श्री गंगाधरराव देशपाण्डेको छः मासका साधारण कारावास दिया गया है। मैं आशा करता था कि उन्हें तथा और लोगोंको इस सालके आखिरसे अधिक समयतक आराम करनेका मौका नहीं मिलेगा । बम्बईकी घटनाओंने, लगता है, मेरी आशाएँ धूलमें मिला दी हैं। उससे पहले मुझे यह यकीन था कि या तो हम जेलके दरवाजे खुलवा सकेंगे, या कमसे कम खुद भी अपने साथियोंके पास उनके आराम घरोंमें पहुँच जायेंगे। लेकिन अब ईश्वर ही जानता है, क्या होगा ? बहादुर सिक्खोंकी गिरफ्तारी 'बॉम्बे क्रॉनिकल 'में छपे एक तारसे पता चलता है कि पंजाब सरकारने सिखों- को सविनय अवज्ञाके लिए उत्तेजित किया है। अमृतसरमें होनेवाले एक सिख दीवान- पर सरकारने पाबन्दी लगा दी थी। सिखोंको यह सहन नहीं हुआ। उन्होंने दीवान किया, और फलस्वरूप ग्यारह सुप्रसिद्ध सिख गिरफ्तार कर लिये गये। उनमें गुरुद्वारा कमेटीके प्रधान, पुराने नेता सरदार खड़गसिंह हैं। दूसरे हैं सरदार बहादुर मेहताब- सिंह, जिन्होंने हाल ही में गुरुद्वारेके प्रश्नपर पंजाब विधान परिषदके उपाध्यक्ष-पदसे तथा सरकारी वकीलके पदसे त्यागपत्र दिया है। तीसरे व्यक्ति अमृतसर नगर कांग्रेस कमेटीके प्रधान सरदार दानसिंह हैं। यदि सिख बराबर शान्त किन्तु दृढ़ बने रहे, तो सिख नेताओंका कारावास गुरुद्वारेके प्रश्नका वांछित समाधान करके रहेगा । हड़तालें हड़ताल होनेपर जिन मिल मजदूरों और अन्य कर्मचारियोंको अपने सहानुभूति न रखनेवाले या विदेशी मालिकोंसे छुट्टी नहीं मिल सकती, उन्हें क्या करना चाहिए ? अहिंसाकी दृष्टिसे इसका केवल एक ही उत्तर हो सकता है। जो कर्मचारी अपने-आप छुट्टी करता है, वह हिंसा करता है, क्योंकि वह अपनी नौकरी का करार तोड़नेका अपराध करता है । अपने मालिककी इजाजत बिना वह गैरहाजिर नहीं हो सकता । Gandhi Heritage Portal