सामग्री पर जाएँ

पृष्ठ:सम्पूर्ण गाँधी वांग्मय Sampurna Gandhi, vol. 21.pdf/५६५

विकिस्रोत से
यह पृष्ठ अभी शोधित नहीं है।

टिप्पणियाँ सरदार गुरुदत्तसिंह ५३३ सात सालतक छिपे रहना और पुलिसके हाथ न आना और उसके बाद अपनेको खुले आम पुलिसके हाथ सौंप देना कोई मामूली बात नहीं है । परन्तु सरदार गुरदत्त- सिंहने ऐसा ही आश्चर्यजनक काम किया है। मेरे सामने उनका खुला पत्र और दूसरे कागजात हैं। अपनी अन्य व्यस्तताओंके कारण में इनपर ध्यान नहीं दे पा रहा हूँ । परन्तु मैं सिखोंको इस बात के लिए बधाई दिये बिना नहीं रह सकता कि जब सरदार गुरदत्तसिंहने आत्मसमर्पण किया और मजिस्ट्रेटने उन्हें हिरासत में लिया, उस समय उन्होंने शान्ति रखी । अहिंसा के बारेमें हमें इतना दृढ़ होना चाहिए कि हम बड़े से बड़े साहसके कदम भी पूर्ण आत्मविश्वासके साथ उठा सकें । अहिंसात्मक बनने के लिए स्वदेशीसे बढ़कर और कोई चीज नहीं। एक व्यक्तिने मुझे लम्बा पत्र भेजा है जिसमें यह कहा गया है कि मुझे इस बातपर आग्रह करना चाहिए कि स्वदेशीका कार्यक्रम पूरा होनेसे पहले कोई भी तहसील सविनय अवज्ञा आन्दोलन शुरू न करे। मैं इस बातसे पूरी तरह सहमत हूँ । मैं यह जानता हूँ कि यदि समस्त भारत स्वदेशीको अपना ले, अर्थात् अपनी करोड़ों कुटियोंमें खादी तैयार करके विदेशी वस्त्रका पूर्ण बहि- ष्कार कर दे, तो हिंसा असम्भव हो जायेगी। मैं चाहूँगा कि सिख और अन्य भारतीय अपना सारा ध्यानं हाथसे सूत कातने और कपड़ा बुननेपर लगायें । खादी टोपीके लिए दस दिनकी सजा बम्बईके पिछले दंगे में खादी टोपीकी बहुत चर्चा रही। डा० साठेपर अपनी खादी टोपी न उतारनेके कारण बुरी तरह हमला किया गया । अब मैंने सुना है कि फोर्टके नाविकोंने बहुत-से निर्दोष व्यक्तियोंकी खादी टोपियाँ जबर्दस्ती छीनी हैं। मैं तो यही आशा करता हूँ कि इस निरर्थक अत्याचारसे राष्ट्रका संकल्प और दृढ़ होगा और हजारों लोग खादी टोपीके लिए, जो तेजीके साथ स्वदेशी और स्वराज्यका एक स्पष्ट प्रतीक बनती जा रही है, मरनेको तैयार हो जायेंगे। परन्तु इसका सबसे स्पष्ट उदा- हरण बंगालसे मिला है। बंगालके कोमिल्ला जिलेमें ब्राह्मण-बाड़ीके एस० डी० ओ० श्री टी० एच० एलिसने १६ तारीखको यह नोटिस जारी किया : सरकारने यह फैसला किया है कि तथाकथित गांधी टोपियाँ पहनना भारतीय दण्ड संहिता की धारा २२८के अधीन एक अपराध है । भद्र लोगोंको यह चेतावनी दी जाती है कि आदेश लागू किया जायेगा । । परिणामस्वरूप, एक स्वयंसेवकपर, इस आदेश के बावजूद खादी टोपी पहननेपर, दस रुपया जुर्माना किया गया। उसने जुर्माना अदा करनेसे इनकार कर दिया और दस दिन जेलमें रहना पसन्द किया। मैं यहाँ धारा २२८ उद्धृत कर रहा हूँ : जो भी कोई व्यक्ति किसी सरकारी कर्मचारीका, जब कि वह सरकारी कर्मचारी अदालती कार्रवाईकी किसी भी स्थितिमें बैठा हो, जानबूझकर अपमान करेगा या उसको किसी प्रकारको बाधा पहुँचायेगा, उसे छः मासतक के साधारण कारावासकी या एक हजार रुपयेतक के जुर्मानेकी अथवा दोनोंकी सजा दी जायेगी । Gandhi Heritage Portal