पत्र-लेखकोंसे ५३७ है, मेरी मनोवृत्तिके बारेमें आपके अनुमानका पूर्णतया खण्डन करेगा; और आप स्वयं भी किसी दिन दुःखके साथ यह अनुभव करेंगे कि आपने एक विनीत अनुयायी और सहकर्मीके साथ अन्याय किया है । हार्वे रोड बम्बई, १७ नवम्बर, १९२१ भवदीय, जमनादास एम० मेहता श्री मेहता के प्रतिवादको मैं सहर्ष स्थान दे रहा हूँ। मैं उन्हें विश्वास दिलाता हूँ कि मैं उनकी भावनाओंको चोट नहीं पहुँचाना चाहता था, बल्कि मेरी टिप्पणियाँ पूर्ण सद्भावनाके साथ लिखी गई थीं। यदि श्री मेहता अपनी आपत्ति के सम्बन्धमें पूर्णतया गम्भीर थे, तो मुझे यह कहने के लिए क्षमा किया जाये कि मुझे उनके भाषण- में कोई तर्क नजर नहीं आया । परन्तु श्री मेहताने अपनी गम्भीरताका जो विश्वास दिलाया है, उसे मैं पूर्णतया स्वीकार करता हूँ । [ अंग्रेजीसे ] यंग इंडिया, १-१२-१९२१ २१६. पत्र - लेखकोंसे ए० मोहम्मद यासीन : लाहौर में उलेमाओके सम्मेलनने एक प्रस्ताव पास कर- के जबर्दस्ती धर्म-परिवर्तनकी निन्दा की है। मैं आपकी इस बात से सहमत हूँ कि मलाबारके मोपला और हिन्दू अभीतक मित्रोंकी तरह रहते आये थे और यदि कलक्टरने आवेश और लापरवाही न दिखाई होती तो यह उपद्रव खड़ा न होता । सी० वी० नायडू पूछते हैं : १. यदि नगरपालिकाएँ और स्थानीय बोर्ड भी जनतापर जबर्दस्ती थोप दिये गये हों, जैसा कि चिरलामें हुआ है, तो क्या इन संस्थाओंको कर अदा नहीं करने चाहिए ? यदि स्थानीय कष्टोंसे छुटकारा पाने के लिए सविनय अवज्ञाका सहारा लिया जाता है, तो इस तरहके करोंकी अदायगी रोक देना न्यायोचित ही होगा, और यदि किसी खास इलाकेके कर-दाता स्वराज्यके लिए सविनय अवज्ञाके इस रूपको अपनाते हैं, तो भी करोंका रोक देना उतना ही न्यायोचित होगा। जाहिर है कि यह दूसरा तरीका वहाँ नहीं अपनाया जा सकेगा जहाँ नगरपालिका जनता द्वारा निर्वाचित है और जहाँ उसके साथ असहयोग नहीं किया जा रहा है। प्रत्येक अवस्थामें वातावरण अहिंसात्मक रखना है, यह बात हम पहले ही मान कर चलते हैं । २. क्या कोई असहयोगी नगरपालिकाओं और स्थानीय बोर्डोंमें निर्वाचित सदस्यको हैसियतसे प्रवेश कर सकता है ? Gandhi Heritage Portal
पृष्ठ:सम्पूर्ण गाँधी वांग्मय Sampurna Gandhi, vol. 21.pdf/५६९
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