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पृष्ठ:सम्पूर्ण गाँधी वांग्मय Sampurna Gandhi, vol. 21.pdf/५७०

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५३८ सम्पूर्ण गांधी वाङ्मय वस्तुतः असहयोगी भारत-भरमें नगरपालिकाओंमें प्रवेश कर रहे हैं, और जहाँ उनके बहुमतकी सम्भावना है वहाँ तो वे विशेष रूपसे ऐसा कर रहे हैं। ३. क्या आप समझते हैं कि दक्षिण भारत अपने यहाँ फैली हुई अस्पृश्य- ताको देखते सविनय अवज्ञाके किसी भी रूपको अपनानेका अधिकारी है ? (आन्ध्र इसमें शामिल नहीं है, केवल तमिलसे ही अभिप्राय है ।) यदि तमिल-भारतका कोई भी भाग अस्पृश्यताके पापको नहीं छोड़ता, तो वह सविनय अवज्ञा करनेके उपयुक्त नहीं माना जा सकता । एक पारसी: चेचकके टीकेको बहुत ही नापसन्द करते हुए भी, मुझे 'यंग इंडिया' के स्तम्भों में उन बातोंके प्रचारके लोभको रोकना पड़ता है जिन्हें मेरे मित्र मेरी सनक कहते हैं। लेकिन टीका और इसी तरहकी दूसरी बुराइयोंका समाधान स्वतन्त्रता प्राप्त करनेके बाद ही निकाला जा सकेगा । [ अंग्रेजीसे ] यंग इंडिया, १-१२-१९२१ २१७. मानवताके नामपर उदारदलीय लोगों के नाम अपने पत्र में मैंने अपनी पूरी बात कह दी है, उसकी व्याख्याकी आवश्यकता नहीं। उसमें मैंने मलाबारकी घटनाओंके अप्रमाणित या एक- तरफा विवरणोंके बारेमें कुछ नहीं कहा है । परन्तु मेरे सामने ऐसे पत्र हैं जिनमें ऐसी- ऐसी अमानुषिकताओंका उल्लेख किया गया है जिनके आगे पंजाबके अत्याचार भी फीके पड़ जाते हैं। मलाबारमें प्रवेश निषिद्ध है । वहाँ जिस तरहकी नृशंसता हो रही बताई जाती है उसमें कैदियोंको दम घोटकर मारनेकी खबर सबसे अधिक चौंकानेवाली चीज है, यद्यपि यही सबसे क्रूर अत्याचार नहीं है। स्वार्थपूर्ण विवरणोंके कारण हिन्दुओंकी दृष्टि पूर्वग्रहोंसे अंधी हो गई है। मैं इस बातसे इनकार नहीं करता कि मोपलाओंने जबर्दस्ती धर्मपरिवर्तन व अन्य अत्याचार किये हैं । परन्तु मेरी आत्मा यह स्वीकार नहीं करती कि उसका बदला निर्दोष मोपलाओंसे या अपराधियोंके बीवी-बच्चोंसे लिया जाये; न ही अन्यायी लोगोंको यन्त्रणा देनेसे मुझे कोई खुशी हासिल होगी । इस प्रकारके प्रतिशोध मानवीय नहीं हैं । मुझे तथ्यों या आरोपोंकी और अधिक चर्चा नहीं करनी है । मैं तो केवल शान्ति- की अपील करता हूँ । सरकार क्या कर रही है ? वह सुरक्षा प्रदान करनेमें इतनी असमर्थं क्यों सिद्ध हुई है ? या उसका कर्त्तव्य केवल प्रतिशोध लेनेतक और मोपलाओं तथा उनके शिकार हिन्दुओंको अलग कर देनेतक ही सीमित है ? यदि यह मान भी लिया जाये कि असहयोगियोंने मोपलाओंको सरकारके विरुद्ध भड़का कर यह उपद्रव शुरू किया था, तो क्या इस समय भी असहयोगी लोग मोपलाओं- १. देखिए “ उदार दलवालोंके नाम ", २७-११-१९२१ । Gandhi Heritage Portal