मानवता के नामपर ५३९ के रोषकी ज्वाला भड़का रहे हैं ? क्या विद्रोहको कुचलनेसे वे सरकारको रोक रहे हैं ? सरकार असहयोगियोंको वहाँ जाने और मोपलाओंको समझाने के लिए अनुमति पत्र क्यों नहीं देती ? यदि वे अपने दिये गये वचनके विपरीत कुछ करें तो बेशक उन्हें गोलीसे उड़ा दिया जाये । सरकार नेकचलनी के लिए कुछ व्यक्तियोंको जमानतके तौरपर अपनी हिरासत में रख ले। जब एक सम्भव उपाय सामने है और जब असहयोगी, कुछ शर्तोंके अधीन, वहाँ जाने और शान्तिके लिए प्रयत्न करनेका प्रस्ताव रख रहे हैं, उस समय सरकारके लिए मनमाने ढंगसे विध्वंस और विनाशपर ही तुले रहना बिलकुल अमा- नुषिकता है। यद्यपि शान्ति और मेलजोल स्थापित करनेका काम निश्चित रूपसे बहुत ही कठिन बना दिया गया है, फिर भी यदि असहयोगियोंको उपद्रव क्षेत्रमें जाने और मोपलाओंको समझाने-बुझाने की पूरी सुविधाएँ दी जायें, तो मैं अब भी उसकी सफलता के बारेमें आशावान हूँ । मोपलाओंने अपनी वीरताका चाहे कितना ही गलत प्रयोग किया हो, पर उनके साथ अच्छा व्यवहार होना चाहिए। मैं मद्रास प्रेसीडेंसीके हिन्दुओंसे प्रार्थना करता हूँ कि वे शान्त रहें और पथभ्रष्ट मोपलाओं को अपने हृदयमें स्थान दें । उनका धर्म उन्हें यह नहीं सिखाता कि कुछ व्यक्तियोंकी गलतियोंके लिए पूरी जातिको ही लांछित किया जाये । उन्हें अपनी गलती भी स्वीकार करनी चाहिए। वे मोपलाओंको जानते थे फिर भी उन्होंने मोपलाओंको और अच्छा पड़ोसी बनानेकी कोशिश नहीं की । हम अपनी पिछली लापरवाहीका फल भोग रहे हैं । अब बिना कोई फर्क किये सभी मोपलाओंको राक्षस बताना और कहना कि वे मानवीय सहानुभूतिके पात्र नहीं हैं, हमारे लिए उचित नहीं है। मोपलाओंकी पाशविकतासे इस्लामको निःसन्देह क्षति पहुँची है । परन्तु, मोपलाओंके खूनका प्यासा होनेसे, हिन्दूधर्मको भी इस्लामकी ही तरह क्षति पहुँच रही है। बलात्कार या हत्या करना काफी बुरी बात है, परन्तु बलात्कारी या हत्यारेकी खाल उधेड़ना, उसके घरकी औरतों- के साथ बलात्कार करना या उसके परिवार के बाकी लोगोंकी हत्या करना भी यदि अधिक नहीं तो उतनी ही बुरी बात जरूर है। मैं नहीं जानता कि दुराचारी या हत्यारा आकस्मिक आवेशमें अपराध कर बैठनेकी दलील नहीं दे सकता । परन्तु मनमाने ढंगसे प्रतिशोध लेनेवाला भी क्या अपनी सफाईमें कोई दलील दे सकता है ? हिन्दुओंको मोप- लाओंके खूनका प्यासा बनकर डायर और ओ डायरके कारनामोंका औचित्य सिद्ध नहीं करना चाहिए । यदि हम मोपलाओंके सम्बन्धमें वीभत्सता और मान-मर्दनकी नीति अपना सकते हैं, तो क्या वैसा करके हम सर माइकेल ओ'डायर और जनरल डायरके कारनामोंको उचित नहीं ठहराते जिन्होंने कल्पित अन्याय और भयके कारण पंजाबमें आतंक फैला दिया था ? मुझे भय है कि सरकार मलाबारके उपद्रवोंको जारी रखने के लिए हिन्दुओंके रोषको भड़काकर अपना स्वार्थ सिद्ध कर रही है । मलाबार और मद्रास के हिन्दुओंको सावधान हो जाना चाहिए। [ अंग्रेजीसे ] यंग इंडिया, १-१२-१९२१ Gandhi Heritage Portal
पृष्ठ:सम्पूर्ण गाँधी वांग्मय Sampurna Gandhi, vol. 21.pdf/५७१
दिखावट