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पृष्ठ:सम्पूर्ण गाँधी वांग्मय Sampurna Gandhi, vol. 21.pdf/५७७

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भाषण : बारडोलीमें ५४५ आप एक कदम आगे जायें। उदाहरणके लिए, उनके घरोंमें जाकर शंकाशील माता- पिताओं को अपने बच्चोंको राष्ट्रीय स्कूलोंमें भेजनके लिए समझायें-बुझायें । सरकार द्वारा संचालित शैक्षणिक तथा अन्य संस्थाओंके बहिष्कारके लिए आपके ताल्लुकेमें कहीं-कहीं अबतक जो तरीके अपनाये गये हैं, आगे उनसे भिन्न और अच्छे तरीकोंसे काम लिया जा सकता है। जैसी कि खबर है, कुछ स्वयंसेवकोंने माता- पिताओंके दयाभावको जगानेके लिए इस खयालसे अनशन किया कि वे अपने-अपने बच्चोंको इन संस्थाओंसे हटा लें। यह अनशन भी एक तरहसे नैतिक हिंसा ही है। इस उपायके अवलम्बनका परिणाम आम तौरपर यह होता है कि लोग कहनेवालोंकी बात अनिच्छापूर्वक मान लेते हैं। लेकिन असहयोगियोंके लिए यह आचरण वांछनीय नहीं क्योंकि वे तो सभीके लिए अधिकसे-अधिक स्वतन्त्रताकी वकालत करते हैं। लेकिन मैं चाहता हूँ, बारडोलीकी शानदार उपलब्धिकी कोई खामी बताने का मतलब लोग यह न समझें कि मैं अपनी निराशा व्यक्त कर रहा हूँ । यह तो है कि मैं बारडोली तहसील के लिए यह नहीं कह सकता कि उसने तत्काल सविनय अवज्ञा करनेकी योग्यता प्राप्त कर ली है, और इसलिए उसे पूरे अंक तो नहीं दे सकता, लेकिन साथ ही आपके सन्तोषके लिए मैं आपको बड़े हर्षके साथ आश्वस्त करता हूँ कि सविनय अवज्ञा और इस तरह स्वराज्यकी तैयारीके रास्तेपर मैंने किसी भी अन्य ताल्लुकेकी अपेक्षा बारडोलीको ज्यादा अच्छी तरह चलते पाया है। आपकी सादगी और उत्कटताका तो कोई सानी नहीं है। हिन्दू-मुस्लिम एकता जितनी सुरक्षित और निश्चित यहाँ है उतनी और कहीं नहीं। मुझे आशा है कि बारडोली अपने इस महान उपक्रममें इसी उत्साहके साथ लगा रहेगा, और तैयारीके रूपमें अब जो थोड़ा-बहुत करना बच रहा है उसे भी वह यथासमय पूरा कर लेगा। केवल तभी आप मुझे एक बार फिर बुलाकर कह सकते हैं कि "अब आप हमारे युद्धका संचालन करिये" और इसी तरह आप मुझे एक शान्तिपूर्ण क्रान्तिका नेतृत्व करनेका आनन्द दे सकते हैं, बशर्ते कि तब भी उसकी आवश्यकता बची रहे । [ अंग्रेजीसे ] बॉम्बे क्रॉनिकल, १०-१२-१९२१ २१-३५ Gandhi Heritage Portal