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पृष्ठ:सम्पूर्ण गाँधी वांग्मय Sampurna Gandhi, vol. 21.pdf/५८२

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५५० सम्पूर्ण गांधी वाङ्मय लोगोंको पहलेसे ही पत्रिकाओंसे, भाषणोंसे इस बातकी तालीम देनी चाहिए कि वे तनिक भी आवाज न करें, झुण्ड बना-बनाकर खादीनगरमें खड़े न रहें, स्वयंसेवकोंके सुझावोंको मानें। जहाँ जानेकी मनाही हो या मनाही की जाये वहाँ न जायें और जहाँ जायें वहाँ वे सब ऐसा कुछ न करें जिससे दूसरोंको असुविधा हो। ये संघमें रहनेकी हमारी योग्यता के लक्षण हैं और जो इस अवसरपर प्रकट होने चाहिए । स्वयंसेवक गरीब व्यक्तिको भी 'तू' न कहें। वे सबको सिपाहीकी तरह आदेश न जो कहना हो उसे विनयपूर्वक कहें। स्वयंसेवकोंका व्यवहार सामान्य सिपाहीसे उलटा होता है। दुकानदार जो बेचें, उसके ठीक-ठीक दाम लें; आये हुए मेहमानोंको लूटनेका विचार न करें। इससे सिद्ध होगा कि हम सभ्य और सुशिक्षित लोग हैं । वहाँ तथाकथित तथा सच्चे असहयोगियोंका काफी बड़ा समुदाय इकट्ठा होगा । वे ऐसा न मानें कि उन्हें पृथ्वीके राज्यका पट्टा मिल गया है । वे सिर्फ यह मानें कि वे सेवा करने के लिए पैदा हुए हैं। हम ऐसी आशा रखते हैं कि सब लोग खादी पहनकर ही आयेंगे । [ स्वागत-समितिके] सभी सदस्य और कांग्रेसके प्रतिनिधि, ये सब खादी पहनकर ही आयें लेकिन अतिथि अथवा यात्री अथवा दर्शक चाहे जिस पोशाकमें आयें, कोई उनका अपमान न करे। जो सहयोगी माने जाते हैं, उनकी बात भी विनयपूर्वक सुनी जाये । कोई बालकको भी हाथ न लगाये । कोई किसीके कपड़ेको न छुए । “देख बिचारी बकरीका भी कोई न पकड़े कान", यह कविता इस राज्यके सम्बन्धमें तो गलत साबित हुई है, लेकिन स्वराज्यके सम्बन्धमें गलत साबित न हो, यह हमें बता देना होगा । यदि हम स्वागत समिति के अध्यक्षपर ही सारा बोझ डालनेका विचार रखते हों तो हम आजसे ही कांग्रेसके इस अधिवेशनको विफल हुआ मान सकते हैं। स्वागत- समितिका अध्यक्ष तो निमित्त मात्र है । उसे मदद करनेवाले हजारों होंगे तभी वह यश प्राप्त कर सकेगा । उसके हाथपैर स्वयंसेवक हैं। अहमदाबादके स्वयंसेवक अगर प्रत्येक स्थानपर फैल जायें, अपने कार्यसे उसे सुवासित करें, तभी काम अच्छी तरहसे हो सकता है। एक भी अनजान व्यक्तिको भटकना न पड़े। जाने-माने और अपरिचित, दोनों तरहके प्रतिनिधियोंके लिए ठीक व्यवस्था होनी चाहिए। ये तो हमारी योग्यताकी निशानियाँ हुई; प्रभुसे मेरी प्रार्थना है कि अहमदाबाद और गुजरातके लोग इसमें उत्तीर्ण हों । [ गुजरातीसे ] नवजीवन, ४-१२-१९२१ Gandhi Heritage Portal