टिप्पणियाँ ५६१ इस तहसील में बड़ी शान्ति और उत्साह के साथ काम किया है। आइए, हम आशा करें कि यदि आवश्यकता हुई तो, इस तहसीलको सरकारसे युद्ध ठाननेका सौभाग्य प्राप्त होगा । सभापति दासको चेतावनी बंगाल के गवर्नर लॉर्ड रोनाल्डशेने उस दिन अपने भाषण में कांग्रेसके मनोनीत सभापति देशबन्धु दासको कुछ नसीहतें और साथ ही यह चेतावनी भी दी कि यदि अहमदाबाद के कांग्रेस-अधिवेशनमें देशबन्धुने ठीक-ठीक आचरण नहीं किया तो गवर्नर साहब उनको इसका मजा चखायेंगे। यदि सभापति महाशय इस मजेको न चख सके, तो मैं जानता हूँ, इसमें उनका दोष नहीं होगा। उन्होंने अपने देशके लिए सर्वस्व अर्पित कर दिया है। वे ऐसे समय में कांग्रेसके सभापति-जैसे ऊँचे पदपर विराजमान हो रहे हैं, जो इस देशके इतिहासमें सबसे अधिक नाजुक है । वे बंगालमें अपने अविराम प्रयत्नों द्वारा नया जीवन फूंक रहे हैं। वे मौका- बेमौका बराबर अहिंसाके सिद्धान्तका प्रचार कर रहे हैं और खुद भी उसपर आचरण कर रहे हैं। उनके इस कठिन कार्यमें हमें हर तरहसे निष्ठापूर्वक उनका साथ देना आवश्यक है । यदि हरएक प्रतिनिधि इस तैयारीसे और इस दृढ़ निश्चयके साथ आयेगा कि चाहे कैसा ही संकट क्यों न उप- स्थित हो, हम लड़ाईमें विजय प्राप्त करके ही मानेंगे, तो सभापतिका काम कुछ हल्का हो जायेगा । प्रतिनिधियोंके सम्बन्धमें मैं आशा करता हूँ कि सभी प्रतिनिधियोंका निर्वाचन हर हालत में कांग्रेसके संविधानके अनुसार ही हुआ होगा। इस प्रकार चुने हुए ये सज्जन अपने मतदाताओंके सच्चे प्रतिनिधि होंगे । मतदाता तो वही लोग हो सकते हैं जिनके नाम कांग्रेसके पत्रकों में दर्ज हैं । जहाँ किसी प्रतिनिधिको जेल जाना पड़ा हो, वहाँ उपचुनाव द्वारा उसकी जगह दूसरा प्रतिनिधि चुना जाना चाहिए। आवश्यक प्रस्तावोंको स्वीकार करते समय सभी प्रतिनिधियोंको उपस्थित रहना चाहिए। मैं आदर्श प्रतिनिधि उसीको मानता हूँ जिसका निजी और सार्वजनिक जीवन निष्कलंक हो, कांग्रेसके कार्यक्रमके सम्बन्धमें उसे अपने जिलेकी जानकारी हो, वह सूत कातनेमें इतना होशियार हो कि दूसरेको सिखा सके, वह हाथकती-बुनी खादी पहननेका आदी हो गया हो, वह अपने राष्ट्रीय ध्येयको सिद्ध करने के लिए तथा हिन्दू, मुसलमान, सिख, पारसी, ईसाई, यहूदी इन सबकी एकताको चिरस्थायी रूप देनेके लिए अहिंसाको अपना धर्म मानता हो, असहयोग कार्यक्रमकी जो-जो बातें उसपर घटित होती हों उनके अनुसार व्यवहार करता हो, उसने जेल जानेकी तैयारी कर रखी हो और यदि सारा नहीं तो अपना अधिकांश समय देशकार्य के लिए दे डाला हो। इसके अलावा यदि वह हिन्दू हो तो उसने छुआछूतका त्याग कर दिया हो और इस साल अपने जिलेके अछूतोंकी कुछ-न-कुछ सेवाएँ की हों । ३० करोड़ देशभाइयोंकी सेवाके लिए छ: हजार कट्टर, सच्चे और निर्भीक तथा पूरे समय काम करनेवाले लोगोंसे इतनेकी उम्मीद रखना कुछ ज्यादा नहीं है। मैं इसी अनुपातसे २१ - ३६ Gandhi Heritage Portal
पृष्ठ:सम्पूर्ण गाँधी वांग्मय Sampurna Gandhi, vol. 21.pdf/५९३
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