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पृष्ठ:सम्पूर्ण गाँधी वांग्मय Sampurna Gandhi, vol. 21.pdf/६०९

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पत्र-लेखकोंसे ५७७ ताका सन्देश देता है । इसे संसारकी शान्तिको खतरा पैदा करनेवाली तथा उसके साधनोंका शोषण करनेवाली नौ सेनाके संरक्षणकी आवश्यकता नहीं पड़ेगी; अपितु इसे करोड़ों लोगोंके सच्चे संकल्पकी आवश्यकता है कि वे जिस प्रकार अपने घरोंमें अपना भोजन स्वयं तैयार करते हैं उसी प्रकारसे अपना सूत कातेंगे। हो सकता है कि भावी पीढ़ियाँ मुझे अनेक भूल-चूकोंका दोषी ठहरायें, पर मुझे पूर्ण विश्वास है कि वे चरखेके पुनरुद्धारका सुझाव देनेके लिए मुझे आशीष देंगी। इस बाजीपर में अपना सब-कुछ लगा सकता हूँ । इसलिए कि चरखा अपनी गतिके साथ शान्ति, सद्भावना और प्रेमके तार कातता चलता है । और साथ ही जिस प्रकार चरखेके लोपका फल भारतकी गुलामी हुआ है, उसी प्रकार इसके स्वैच्छिक पुनरुद्धारका फल होगा भारतका स्वतन्त्र होना । [ अंग्रेजीसे ] यंग इंडिया, ८-१२-१९२१ २३३. पत्र लेखकोंसे आर० वी० बाहुलेकर : १. कृपया गतांकमें पत्र लेखकोंको दिये गये उत्तरोंको पढ़िए। दया और घृणा उस व्यक्तिके लिए समान ही हैं जिसने पूर्णता प्राप्त कर ली हो । उसके समक्ष हत्याका कोई कारण नहीं रह जायेगा । मेरे जैसे अपूर्ण व्यक्तिके लिए प्रेम और घृणा दो भिन्न-भिन्न तथा परस्पर-विरोधी अनुभूतियाँ हैं; और अपूर्ण व्यक्तियों के सम्बन्धमें 'गीता के उपदेशको लागू करनेपर मुझे यह विश्वास करना बड़ा कठिन जान पड़ता है कि हम क्रोध किये बिना भी हत्या कर सकते हैं । मेरी विनम्र सम्मतिमें अपूर्ण व्यक्तियोंपर इसका प्रयोग करना वेदान्तके साथ व्यभिचार करना है । ऐसा आचरण तो पूर्ण व्यक्तियोंके लिए ही सम्भव है । २. मैंने त्रावणकोरके सुसंस्कृत “अछूतों" को परामर्श दिया है कि वे सामूहिक रूपसे नहीं, मन्दिरोंमें केवल अपने ही लिए प्रवेशाधिकारकी माँग कर सकते हैं, बशर्ते कि वे संयमसे काम लें तथा न्यायालयोंकी सहायता लिये बिना प्रबन्धकर्त्ताओंके अप- मानजनक व्यवहारको सहन कर सकें । जबतक अस्पृश्यताकी यह बुराई देशमें मौजूद है, तबतक " अछूतों को मेरी यही सलाह है कि वे मन्दिरोंमें अपने प्रवेशाधिकारकी आजमाइश न करें। मैंने किसी भी दशामें धार्मिक स्थलोंमें प्रवेशका परामर्श नहीं दिया है । सिद्धान्ततः मेरा यह मत है कि हिन्दू मन्दिरोंके संरक्षकोंको अछूतोंके लिए भी उन भागोंके कपाट खोल देने चाहिए जो अन्य वर्गोंके लोगोंके लिए खुले हैं । एस० गोविन्द स्वामी अय्यर : आपकी आस्था असह्योगमें है, तो विद्यार्थियोंकी सैनिक टुकड़ीमें आप सम्मिलित नहीं हो सकते । [ अंग्रेजीसे ] यंग इंडिया, ८-१२-१९२१ २१-३७ Gandhi Heritage Portal