५८२ सम्पूर्ण गांधी वाङ्मय लोग चन्दा देते-देते रुक गये, लेकिन व्यवस्थापकोंने इसकी कोई परवाह नहीं की । गुजरात तथा अन्य स्थानोंपर हुई सैकड़ों सभाओंमें अन्त्यजोंने बिना किसी रोक-टोकके भाग लिया है। अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटीने अन्त्यजोंके लिए अलग-अलग स्थानोंपर लगभग ५०,००० रुपयेकी रकम मंजूर की है । प्रान्तोंने जो पैसा खर्च किया है, सो अलग है । इस तरह असह्योगी चारों ओर निष्पक्ष होकर काम कर रहे हैं । प्रत्येक प्रान्तमें उत्साही और चारित्र्यवान युवक शुद्ध अन्तःकरण से अन्त्यजोंकी सेवामें सर्वार्पिण कर रहे हैं। यह पहला अवसर है कि अन्त्यज भाइयोंके माँग न करनेपर भी उन्हें प्रत्येक निर्वाचन क्षेत्रसे प्रतिनिधि चुना गया है। इतना तो उपर्युक्त अन्त्यज भाइयों और उन जैसे अन्य असन्तुष्ट भाइयोंके सन्तोषकी खातिर हुआ। लेकिन यह बताते समय कि अस्पृश्यता निवारणका यह आन्दोलन आगे बढ़ रहा है हमें इस बातको भी स्वीकार करना होगा कि उनकी फरियादमें सचाई है । अनेक लोग अपने दोषोंको छिपानेकी खातिर स्पर्श करनेका ढोंग करते हैं, लेकिन नितान्त निर्मल हृदयसे नहीं। इस तरह किये गये स्पर्शका फल कड़वा होगा। अस्पृश्यता अधर्म है, इसलिए यह दोष जब दिलसे, लोगोंके हृदयसे निर्मूल होगा तभी इसका मधुर फल प्राप्त होगा। यह कोई राजनीतिकी चीज नहीं है कि जिसमें दूसरोंको धोखा देकर भी काम चलाया जा सकता है । यह अन्त्यजोंको सन्तोष देने अथवा घूस देनेकी प्रवृत्ति नहीं है । यह तो केवल आत्माको सन्तुष्ट करनेकी बात है। और उसके सम्बन्धमें हमारी कल्पना भी यही है कि जबतक हिन्दू समाज इस पाप- को निकाल बाहर नहीं फेंकेगा तबतक यह पाप अदृश्य रूपसे हमारे आड़े आता रहेगा और हमें स्वराज्य प्राप्त नहीं करने देगा। कर्मकी गति गहन है । कर्मके विधानमें अप- । वाद नहीं है। अपने अच्छे-बुरे कर्मोंका, पाप-पुण्य आदिका फल हमें प्रकट या अप्रकट रूपसे मिलता ही रहता है । । मैं यह स्पष्ट रूपसे मानता हूँ कि हम जबतक इस मैलको दिलसे निकाल बाहर नहीं फेंकेंगे, शान्तिके [ अहिसाके ] मार्गको नहीं अपनायेंगे, हिन्दू-मुसलमान सच्चे मनसे एक नहीं हो जायेंगे तबतक हम स्वाधीन नहीं होंगे। इन तीनों वस्तुओंको स्थूल रूपसे नहीं मापा जा सकता। ये जबतक सिद्ध नहीं हो जाती तबतक स्वराज्य नहीं मिल सकता और जब स्वराज्य मिलेगा तब ये तीनों सिद्धियाँ हमें मिल चुकी होंगी। जबतक छ: करोड़ अन्त्यज हमारे द्वारपर पुकार करते रहेंगे और हम लोग उनकी पुकार नहीं सुनेंगे तबतक हमें स्वराज्य नहीं मिलेगा कभी नहीं मिलेगा। -- लेकिन हिन्दू अपने पापोंका परिमार्जन कर भी लें तो इससे क्या अन्त्यजोंको विमान मिल जायेगा -- क्या उन्हें स्वर्ग प्राप्त हो जायेगा ? यह पुरुषार्थ तो उन्हें स्वयं ही करना होगा। उन्हें शराब पीना, जूठा अन्न लेना छोड़ देना चाहिए। उन्हें माँसाहार छोड़ देना चाहिए, सेवाकी खातिर गन्दगीकी सफाईका ऐसा काम करते हुए भी, जिसमें गन्दे होनेका डर है, स्वच्छ रहना और ईश-भजन करना चाहिए । यह सब तो तभी हो सकता है जब अन्त्यज खुद इसे करें, उनके लिए दूसरे लोग यह नहीं कर सकते। उनकी भूखको दूर करनेके लिए चरखा और करघा मौजूद ही हैं। हजारों अन्त्यज इसे अपनाकर अपनी दशा सुधारनेमें सफल हुए हैं। स्वदेशीका आन्दोलन Gandhi Heritage Portal
पृष्ठ:सम्पूर्ण गाँधी वांग्मय Sampurna Gandhi, vol. 21.pdf/६१४
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