५८४ सम्पूर्ण गांधी वाङ्मय लेना । एन्ड्रयूजको मैंने तो नहीं लिखा है लेकिन तुम लिख सकते हो। मैंने नहीं लिखा क्योंकि यह कुछ दबाव डालनेकी बात मानी जायेगी । श्रीमती नेहरू अगर मुझे पत्र लिखें तो इससे मुझे खुशी होगी । दूसरों द्वारा बताये गये व्रतोंको लेनेमें निश्चय ही भय है । तुम्हें जो व्रत सुझाये गये हैं उनमें से जो तुम्हें लेने योग्य मालूम हो और लिया जा सकता हो उसे ले लो और उसके साथ भूतकी तरह लगे रहो । अभी लेनेकी शक्ति न हो तो मत लेना । न लेने में विघ्न नहीं है, विघ्न तो उसके न पालनेमें गुजराती पत्र (एस० एन० ११४२८) की फोटो नकलसे । । बापूके आशीर्वाद २३९. पत्र : महादेव देसाईको चि० महादेव, शुक्रवार [९ दिसम्बर, १९२१] तुम्हारा तार मिला । 'इंडिपेंडेंट' के प्रकाशनके लिए तुम्हें जमानत जमा करानी पड़ी, यह बात मुझे अच्छी नहीं लगी, लेकिन पण्डितजी जो कुछ कहें, उसे करना हमारा कर्त्तव्य है । तुम गिरफ्तार हो जाओ तो निश्चय ही मुझे खुशी होगी। लेकिन पण्डितजीसे कह दो कि अगर फिर कोई जमानत माँगी जाती है तो उसे जमा न करा- कर हस्तलिखित पत्र निकालना अच्छा होगा। ऐसा करना सबसे आसान है। निश्चय ही तुम्हें गिरफ्तार कर लेंगे, लेकिन इसकी कोई चिन्ता नहीं है । सरूप और रणजीत वहाँ जा रहे हैं; वे भी [ पत्रके ] मालिक बन सकते हैं। मैं यहाँसे किसीको भेजनेकी कोशिश जरूर करूँगा । प्यारेलाल बेशक आ सकता है । । वे मूल अंग्रेजी पत्र (एस० एन० १०६०२८) से । बापूके आशीर्वाद १. महादेव देसाईने जमानत देकर ७ तारीखको 'इंडिपेंडेंट' का काम-काज अपने हाथमें लिया । शुक्रवारको उपर्युक्त तिथि ही पड़ती थी । Gandhi Heritage Portal
पृष्ठ:सम्पूर्ण गाँधी वांग्मय Sampurna Gandhi, vol. 21.pdf/६१६
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