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पृष्ठ:सम्पूर्ण गाँधी वांग्मय Sampurna Gandhi, vol. 21.pdf/६२४

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५९२ सम्पूर्ण गांधी वाङ्मय यदि हमने गोरे सिपाहियोंसे डरना छोड़ देनेका निश्चय कर लिया हो तो फिर हमें कर्नल प्रतापसिंहके गेहुँए रंगके सिपाहियोंसे डर क्यों मानना चाहिए ? डरना तो हमारी अपनी अशान्ति और वैर-भावकी सूचना है। जिसे हम दुश्मन मानेंगे वह जरूर ही हमारा दुश्मन हो जायेगा । यदि हम दुश्मनको भी अपना मित्र मानकर उसके साथ वैसा ही व्यवहार करेंगे तो वह समय पाकर जरूर ही मित्र हो जायेगा । मनुष्य जैसा विचार करता है, वैसा ही बनता है । करे मित्रता, परन्तु पाये दुश्मनी, यह हो ही नहीं सकता। हमारा असहयोग शत्रुको भी मित्रताके द्वारा जीतनेका साधन है । यह केवल हिन्दू धर्मकी ही नहीं, इस्लामकी भी यही शिक्षा है । इस्लाममें धैर्य- को सबसे ऊँचा पद दिया गया है । युद्धके लिए विधान तो है; पर वह तभी जब दूसरे सब उपाय चुक गये हों और जालिमकी अपेक्षा उनकी संख्या कम हो तथा न लड़ना कायरताका चिह्न माना जाये एवं युद्ध करवानेवाला नेता कोई ऐसी उज्ज्वल आत्मा हो कि जिसपर सबका भरोसा हो और जिसने हर तरहके स्वार्थको तिलांजलि दे दी हो। पर हिन्दुस्तानकी अवस्था ऐसी है ही नहीं और हो भी नहीं सकती । हमारी तादाद बहुत है । फिर हमें वैसी लड़ाईके लिए प्रेरित करनेवाला कोई नहीं। ऐसा युद्ध हमारी मर्दानगीका चिह्न नहीं है; और न हम खुद अभी दूसरे उपायोंको करके थक ही चुके हैं । हमने अभी शान्तिका पाठ पूरा-पूरा नहीं पढ़ा है। हमने अभी स्वदेशी व्रतका पूरा पालन नहीं किया है । हम अभी प्रामाणिक नहीं बने। हिन्दू और मुसलमानोंने अभी पारस्परिक मनोमालिन्यको पूरी तरह धो नहीं डाला है । अभीतक हमारे बहुतसे लोगोंको सरकारका साथ देना प्यारा मालूम होता है। ऐसी स्थितिमें युद्ध ठानना जेहाद' नहीं बल्कि 'फसाद' माना जा सकता है। मैंने कितने ही आलिमोंके मुंहसे यह बात सुनी है। । अतएव प्रत्येक धर्म की दृष्टिसे विचार करते हुए एक ही निर्णय लिया जा सकता है कि हमें दुश्मनको प्रेमके बलपर जीतना है । सो, चाहे गोरी सेना आये चाहे काली, उसके साथ हमारा व्यवहार एक ही-सा होना चाहिए। इसलिए, यद्यपि मेरी धारणा है कि कर्नल प्रतापसिंहजी हमें दण्ड देनेके लिए आनेवाले नहीं हैं, तथापि मान लीजिए कि वे आयें अथवा और कोई कर्नल अपनी टुकड़ी लेकर आये तो हम कह सकते हैं - "पधारिए कर्नल साहब " । दास पकड़े गये ? ऐसी ही अफवाह देशबन्धु दासके पकड़े जानेके विषयमें उड़ रही है। मैं नहीं मानता कि वे गिरफ्तार कर लिये गये हैं । पर हाँ, कर्नल प्रतापसिंहके यहाँ आनेकी अपेक्षा देशबन्धुकी गिरफ्तारीकी सम्भावना अधिक सच हो सकती है। जहाँ दमन-नीति हमेशा बढ़ती जा रही है, और भारतके बादलका रंग बदलता रहता है वहाँ हम क्या कह सकते हैं कि कौन कब पकड़ा जायेगा ? साथ ही, यह जाननेकी भी हमें क्या जरूरत कि " कौन पकड़ा गया है । " चाहे तमाम अगुआ लोग क्यों न पकड़ लिये जायें, हमें अशान्त होने का कोई कारण नहीं। यदि हम आलसी हों तो काममें जुट Gandhi Heritage Portal