परिशिष्ट ५९९ शिकायत करने दौड़ता था । वास्तवमें मैं इस दण्डके प्रति उपेक्षा दिखाकर अपने सम्मानको कायम रखनेका प्रयत्न करता था; और इस प्रकार नैतिक विजय मेरी होती थी ।" यह बात स्वामीके विषयमें भी लागू है । उनको जितने ही ज्यादा दिनोंतक बन्दी रखा जायेगा, ईमानदार लोगोंकी नजर में सरकार उतनी ही ज्यादा ओछी सिद्ध होगी । हाँ, बेचनी है; और आप जितना सोचते हैं, उससे गहरी। इसको कम करनेका उपाय ? सो तो मैंने अपने पिछले पत्रमें लिखा था । सिन्धके अधिकारियोंको न्याय- परायण होना चाहिए तथा "नई भावना" को समझकर चलना चाहिए। आप कहते हैं कि आप आदर्शको उतना ही महत्व देते हैं, जहाँतक कि वे अमलमें लाये जा सकते हैं । और अधिकारी वर्ग स्वतन्त्रता, समानता तथा न्यायके जिन आदर्शोका दम भरता है, हमारे प्रति व्यवहारमें उन्हीं आदर्शोंको अमल में लाने में वह बार-बार असफल रहा है। मेरे दृष्टिकोणसे सच्चा आदर्शवादी तो व्यावहारिक होता है और जो व्यक्ति प्रामाणिकताके साथ व्यावहारिक हो, वह आदर्शवादी ही है। उसके कार्य में आदर्शवादिता है । स्वामीको दी गई सजाके पीछे मुझे सरकारकी शक्ति जतलानेकी इच्छा दिखाई पड़ती है । इस प्रकारकी शक्ति दुर्बलता ही है । इसलिए कि न्यायको पैरों तले कुचलने वाली शक्ति वास्तवमें दुर्बलता होती है • हिंसाकी दुर्बलता | - आप इतने सुसंस्कृत हैं, देश-देशान्तर घूम चुके हैं इसपर भी लगता है कि आप सरकारकी नीतिको न्याय-संगत ठहराते हैं । इसका मैं केवल एक ही कारण समझ पाया हूँ और वह यह कि एक गुलाम देशको जो अपमान और कष्ट सहने पड़ते हैं उनकी जानकारी आपको है ही नहीं। डायरने ३००-४०० भारतीयोंको गोलियोंसे उड़ा दिया; और वह ९०० पौंड वार्षिक पेंशन पा रहा है और मुझे मालूम हुआ है कि उसके यूरोपीय प्रशंसकोंने उसे लगभग ३०,००० पौंडकी एक थैली भी भेंटमें दी है। किन्तु स्वामी - जैसे निर्दोष भारतीय केवल देश-प्रेमके अपराधमें जेलोंमें सड़ रहे हैं। एक समय था जब ब्रिटिश अधिकारी सहनशीलता, सहानुभूति तथा न्याय आदि महान् गुणोंसे विभूषित माने जाते थे । यहाँतक कि १९१४में जब महायुद्ध शुरू हुआ, तो राष्ट्रीय कांग्रेसने निश्चय किया था कि " भारत हर समय और हर हालत में साम्राज्यका साथ देगा ।" आज कांग्रेस युवराजके आगमनका बहिष्कार कर रही है और इसमें महाविभव- का अपना कोई दोष नहीं है। इसका कारण ? बेचनी दिन-प्रतिदिन बढ़ती जा रही है । क्यों ? राज्य और राष्ट्र, सरकार और जनता के बीचकी खाई दिन-प्रतिदिन चौड़ी होती जा रही है। क्यों ? सरकार अपने राजदण्डका प्रयोग करनेके लिए अत्यधिक उतावली हो रही है; उसका बल प्रयोगमें विश्वास है । क्या आप जानते हैं कि राजनीतिक विचारोंके कारण हमारे कितने नौजवान आज जेलमें हैं ? तिलक-दिवसपर लिखते हुए, क्या मैं यह भूल सकता हूँ कि भारत- की सेवा करनेवालों में से सर्वश्रेष्ठ लोगोंको एक-न-एक बार अपनी देशभक्तिके लिए दण्ड भोगना ही पड़ा है। विद्वान् तिलक, देशभक्त तिलकको एकसे अधिक बार जेल भेजा गया। एनी बेसेंटको नजरबन्द किया गया था, लाला लाजपतरायको निर्वासित किया गया था । विपिनचन्द्र पालको पंजाब में घुसने नहीं दिया जाता था। वे विद्रोही Gandhi Heritage Portal
पृष्ठ:सम्पूर्ण गाँधी वांग्मय Sampurna Gandhi, vol. 21.pdf/६३१
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