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पृष्ठ:सम्पूर्ण गाँधी वांग्मय Sampurna Gandhi, vol. 29.pdf/४९६

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४७० सम्पूर्ण गांधी वाङ्मय समाज-सेवा, और अधिकारी लोग, २४६; - के काम में हिसाब किताब रखनेका महत्त्व, ९५; के कार्य में अवांछनीय तत्त्वोंको नेतृत्व प्रदान न किया जाना, १०७-८; - के लिए ब्रह्मचर्य और सादे जीवनकी जरूरत, ७६-७७; के लिए स्थायी कोषकी व्यवस्थाकी जरूरत नहीं, १०० सर्ल, न्यायाधीश, का निर्णय कि केवल ईसाई धर्मके अनुसार किया गया विवाह ही वैध है, २०७-८ सार्वजनिक सभा, ४१, ४२ सिंह, रामनारायण, २२७ सीता, १८५ सीमंड्स, ९४ सुकरात, २२२ सुदामा, २१४ सुब्रह्मण्यम, जी०, ४२; पर उसके मालिक द्वारा प्रहार, ४३ सेल्बोर्न, लॉर्ड, २८, ६४, ६७ सेवेज, डा०, ७६ सैंडर्स, ४२ सैंडो, १० सोढा, रतनसी मूलजी, १६५ सोढा, रेवाशंकर रतनसी, २११ सोरावजी, २५० सोराबजी (पारसी रुस्तमजीके पुत्र), २३५ सोलोमन आयोग, -का भारतीयों द्वारा बहिष्कार, २४०; की नियुक्ति, २३८-४० ; -की सिफारिश, २४७; - के विरुद्ध स्मट्सका सुझाव, २४३-४४ सोलोमन, सर रिचर्ड, ९६, ९७ सोलोमन, सर विलियम, २३८ स्मट्स, जनरल, १५, १७, १०१, १०२, ११९-२०, १२४, १२६, १४३, पा० टि०, १५०-५२, १७४, २०१, २३९, २४३-४६, की असहमति, २२४; - के अनुसार पाश्चात्य सभ्यता और प्राच्य सभ्यताका समन्वय सम्भव नहीं, ७०; - के लिए सत्याग्रहियोंकी शान्ति और दृढ़ता, दुखका कारण बन गई, २२८; द्वारा खूनी कानूनको बहाल रखते हुए सहयोगी कानून जारी करना, १४६; ने ३ पौंडी करको रद करने की प्रतिज्ञा तोड़ी, २०५ - ने सोलोमन आयोगकी नियुक्ति की, २३८; – से गांधीजीका समझौता, २४४; -से ३ पौंडी कर समाप्त करनेके लिए गांधीजीने एक बार फिर कहा, २२४ स्टेंट, वेर, १३९ स्टेट्समैन, ४२ पा० टि० स्टेड, १७, १४० स्वतन्त्र हिन्दुस्तानी, -और स्वतन्त्र व्यापारी, २३ स्वराज्य - प्राप्ति के लिए सत्याग्रह, ३ स्वाजी, (जाति), १० ह हंटर, सर विलियम विल्सन, २०, ५३-५४, ९२ हंसराज गोकुलदास, देखिए गोकुलदास हंसराज हनीफाबाई, २२ हबीब, सेठ हाजी, ८४; और चौथा प्रस्ताव, ८०-८३