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पृष्ठ:सम्पूर्ण गाँधी वांग्मय Sampurna Gandhi, vol. 3.pdf/२४४

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१३३. पत्र : ईस्ट इंडिया असोसिएशनको पो० ऑ० बॉक्स १८२ डर्बन मई १८, १९०१ सेवामें अवैतनिक मन्त्री ईस्ट इंडिया असोसिएशन लंदन प्रिय महोदय, मैं यह पत्र विशेष रूपसे यह सुझानेके लिए लिख रहा हूँ कि श्री चेम्बरलेन और सर ऑल्फ्रेड मिलनरसे एक शिष्टमंडलका मिल लेना उचित होगा। यदि श्री चेम्बरलेन से नहीं, तो भी सर ऑल्फ्रेड मिलनरसे मिल लेना तो उचित मालूम ही होता है । इसमें कोई सन्देह नहीं कि दोनों राजनयिकों में अत्यन्त महत्त्वपूर्ण मामलोंपर बातचीत होगी, और यदि सब प्रकारके विचारोंका प्रतिनिधित्व करनेवाला एक सबल शिष्टमंडल भारतीयोंका प्रश्न उनके सामने प्रस्तुत करे तो उससे हित ही होगा। उसमें सर लेपेल', श्री दादाभाई, सर विलियम वेडरबर्न, सर मंचरजी, सर्वश्री रमेशदत्त', परमेश्वरम् पिल्ले और गस्ट जैसे व्यक्ति हो सकते हैं। लॉर्ड नॉर्थेब्रुक और रे से मेरी जो बातचीत होती थी उससे मेरा यह खयाल होता है कि यदि उन दोनोंमें से किसी एकसे कहा जाये तो वे प्रतिनिधिमण्डलका नेतृत्व अवश्य करेंगे। जिन तथ्योंकी आपको आव- श्यकता होगी, वे सभी पहले ही भेजे जा चुके हैं । उसी आशयके पत्र भारतीय राष्ट्रीय महासभाकी ब्रिटिश समिति आदिको भी भेजे जा रहे हैं । दफ्तरी अंग्रेजी प्रतिकी फोटो नकल (एस० एन० ३८२५) से । आपका सच्चा, १. सर लेपेल ग्रिफिन । २. रमेशचन्द्र दत्त, प्रसिद्ध भारतीय हाकिम और कांग्रेसके लखनऊ अधिवेशन (१८९०) के अध्यक्ष । Gandhi Heritage Portal