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पृष्ठ:सम्पूर्ण गाँधी वांग्मय Sampurna Gandhi, vol. 3.pdf/२४६

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२०६ सम्पूर्ण गांधी वाङ्मय भारतीय शरणार्थी डर्बनमें हैं; इसलिए मुझे आपका ध्यान इस तथ्यकी ओर आकर्षित करनेके लिए कहा गया है कि नेटालके लिए चार अनुमतिपत्र बहुत कम हैं। केपटाउनके दो नामोंके लिए मैंने तार दे दिया है। दफ्तरी अंग्रेजी प्रतिकी फोटो नकल (एस० एन० ३८२९) से । आपका आज्ञाकारी सेवक, सेवामे तैयब १३६. तार : तैयबको [ डर्बन ] मई २१, १९०१ मारफत गुल केपटाउन अनुमतिपत्र सचिवको भेजनेके लिए कृपया बाकायदा चुने दो शरणार्थियोंके नाम भेजें। [ अंग्रेजीसे ] साबरमती संग्रहालय, एस० एन० ३८२८ । १३७. पत्र : रेवाशंकर झवेरीको गांधी १४, मर्क्युरी लेन डर्बन मई २१, १९०१ मुरब्बी भाई रेवाशंकर', कविश्री के गुजर जाने की खबर भाई मनसुखलाल के पत्र से मिली। उसके बाद अखबार में भी वही देखा । बात मान सको ऐसी नहीं है । मनसे बिसारते नहीं बनती। विचार करनेका भी इस देशमें थोड़ा ही अवकाश है। टेबिलपर बैठा था कि खबर पाई। पढ़कर एक मिनिट उदास हुआ। फिर तुरत आफ़िसके काम में लग गया। ऐसी यहाँकी जिन्दगी है पर जब भी जरा- सी फुरसत मिलती है तब यही विचार चलता है। झूठा कहो चाहे सच्चा, मुझे उनसे बड़ा १. रेवाशंकर जगजीवनराम झवेरी, गांधीजीके आजीवन मित्र । २. राजचन्द्र रावजीभाई महेता या रायचन्दभाई महेता, जो कवि तथा सत्यान्वेषी सन्त थे । गांधीजीने अपनी आत्मकथामें उनपर एक अध्याय ( भाग २, अध्याय १) लिखा है । ३. श्री राजचन्द्रके भाई । देखिए पादटिप्पणी २ । Gandhi Heritage Portal