एक चेकके बारेमें दफ्तरी टीप २०९ पूर्वी भारत संघ (ईस्ट इंडिया असोसिएशन) संयुक्त कार्रवाईका सुझाव पहले ही दे चुका है । इसलिए मैं सादर निवेदन करता हूँ कि यदि सभी मतोंके लोगोंका प्रतिनिधित्व करनेवाली एक छोटी-सी समिति बना दी जाये और सदा संगठित कदम उठाये जायें तो हमें बहुत-कुछ सफलता मिलेगी। उपनिवेश मन्त्रीके असहानुभूतिपूर्ण उत्तरसे यहाँ बुरा प्रभाव पड़ा है और भारतीयोंके प्रति विरोधको और भी प्रोत्साहन मिला है। इसलिए श्री चेम्बरलेनको या तो पत्र लिखा जाये या उनसे व्यक्तिगत भेंट की जाये। मेरी तुच्छ रायमें जानकारी प्राप्त करनेका यही एक तरीका हमारे मामलेकी परिस्थितियोंके अधिक अनुकूल पड़ता है। रायटर द्वारा तारसे भेजे गये श्री चेम्बरलेनके उपर्युक्त उत्तरसे कुछ बिगाड़ होनेका अनुमान है। उसका अर्थ यह लगाया गया है कि वे लोगोंकी चीख-पुकारके सामने झुक जायेंगे और भारतीयोंको बिलकुल त्याग देंगे। मैं जानता हूँ कि हम जो मौकेपर मौजूद हैं, अदूरदर्शितासे ग्रस्त हैं । और इसके फलस्वरूप हो सकता है कि हम संकुचित और सीमित दृष्टि अपना लें और वहाँकी परिस्थिति या हमारी ओरसे काम करनेवाले नेताओंकी स्थितिकी ओर उचित ध्यान न दें। इसलिए यदि मेरे सुझावमें कोई ढिठाईकी बात हो तो मुझे विश्वास है कि आप कृपाकर उसकी ओर ध्यान न देंगे । मैं इस पत्र की एक प्रतिलिपि माननीय दादाभाई नौरोजीको भेज रहा हूँ । दफ्तरी अंग्रेजी प्रतिकी फोटो नकल (एस० एन० ३८३६ ) से १४१. एक चेकके बारेमें दफ्तरी टीप आपका सच्चा, डर्बन जून २, [१९०१] प्रस्ताव यह था कि श्री उनकी शालाके तो कांग्रेस, शेख फरीदकी जायदाद लेनेके यह चेक कांग्रेसके प्रस्तावकी रूसे दिया गया है। लिए चन्दा किया जाये और अगर चन्देसे पूरा न पड़े बाद, जो पैसा बचे वह श्री डनको दे दे। चंदा अब बढ़ेगा, ऐसा नहीं लगता । इसलिए चेक दे देनेकी जरूरत मालूम होती । सो, आजके दिन चेक काटा है । प्रस्ताव, २३ नवम्बर, १९०० । मूल गुजराती प्रतिकी फोटो नकल (एस० एन० ३८३७) से । मो० क० गांधी Gandhi Heritage Portal
पृष्ठ:सम्पूर्ण गाँधी वांग्मय Sampurna Gandhi, vol. 3.pdf/२४९
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