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१५५. टिप्पणी : वकीलकी सलाहके लिए अक्टूबर २, १९०१ १८९७ का अधिनियम १८, थोक और फुटकर व्यापारियों को परवाने देनेका नियमन और नियन्त्रण करनेके लिए है। १८७२ के कानून १९ की धारा ७१ उपधारा (क) में जिन परवानोंका जिक्र है उनमें, इस अधिनियमकी धारा १ द्वारा, थोक व्यापारियोंके परवाने भी शामिल कर दिये गये हैं। हमारा कथन है कि यह इसलिए किया गया है कि थोक व्यापारियोंके परवाने भी निगम ( कारपोरेशन) के नियन्त्रणमें आ जायें । इस अधिनियमकी धारा ३ की रचना विशेष रूपसे इस प्रकार की गई है कि " फुटकर व्यापारियों" शब्दोंमें फेरीवालोंकी गिनती हो। हमारा कथन है कि इसका मतलब यह निकलता है कि शेष सब व्यापारी इस गिनतीसे बाहर हो गये । वकीलकी रायमें, इस अधिनियम के अनुसार रोटीवालों या कस्साबोंकी गिनती फुटकर व्यापारियों में होगी या थोक व्यापारियों में ? उनके परवानोंपर यह अधिनियम लागू होगा या नहीं ? वकीलका ध्यान इस तथ्यकी ओर आकृष्ट किया जाता है कि १८७२ के कानून १९ में रोटीवालों और कस्साबोंके परवानोंके लिए दरोंकी तालिका फुटकर दुकानदारोंके परवानों की तालिकासे अलग है; और कमसे कम आम लोगोंका खयाल तो यह है कि रोटीवालोंके परवाने, रोटी पकाने-बेचने के रोजगारसे असम्बद्ध कारोबारपर लागू नहीं होते। और इसी प्रकार फुटकर व्यापारीका परवाना रोटी पकाने-बेचनेके कारोबारपर लागू नहीं होता । मूल अंग्रेजी प्रतिकी फोटो नकल (एस० एन० ३९१५) से मो० क० गांधी Gandhi Heritage Portal