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पृष्ठ:सम्पूर्ण गाँधी वांग्मय Sampurna Gandhi, vol. 3.pdf/२६०

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सेवामें माननीय उपनिवेश-सचिव पीटरमैरित्सबर्ग १५६. पत्र : उपनिवेश-सचिवको १४, मर्क्युरी लेन डर्बन अक्टूबर ८, १९०१ श्रीमन्, मैंने गत नवम्बर मासमें पोर्टशेप्सटनकी एक जायदादका वहाँके जान मुहम्मदके नाम तबादला करनेके बारेमें सरकारकी सेवामें एक पत्र भेजा था । सरकारने कृपापूर्वक यह निर्णय किया था कि यदि पट्टकी शर्तें पूरी कर दी गई हैं तो सामान्य रीतिसे तबादलेका हुक्म हो जायेगा । सब किस्तोंकी अदायगी हो जानेपर मैंने अपने पी० मैं० बर्गके एजेंटकी मारफत तबादलेके अन्तिम दस्तावेजके लिए प्रार्थनापत्र भेजा और उसने २१ अगस्तको मुझे लिखा कि सरकारने स्वत्वाधिकारकी आज्ञा देने से इनकार कर दिया है, क्योंकि " बिक्री और खरीदके प्रमाणपत्र में जो निर्माण सम्बन्धी धारा है, उसका पालन नहीं हुआ है । " मैं अपने मुअक्किलसे लिखा-पढ़ी करता रहा हूँ और मैं देखता हूँ, यह सच है कि उसने मजिस्ट्रेटसे लिखित अनुमति पहले लिये बिना ही लकड़ी और लोहेकी इमारतें निर्मित की हैं। परन्तु मुझे मालूम हुआ है कि ऐसी इमारतें उस स्थान में सर्वत्र निर्मित हुई हैं। इतना ही नहीं, मजिस्ट्रेटने इमारत के मूल्यके विषय में अपना प्रमाणपत्र दिया है जो कि महासर्वेक्षक (सर्वेयर जनरल ) के सामने पेश किया गया था । मुझे और भी मालूम हुआ है कि, इसी परिस्थितिमें दूसरोंको स्वत्वाधिकारके दस्तावेज दिये गये हैं; कि, लकड़ी और लोहेकी इमारत खड़ी करनेसे पहले मेरे मुअक्किलने ईंटें बनानेकी आज्ञा माँगी थी; कि, आज्ञा न मिलनेपर ही उसने लकड़ी और लोहेकी इमारत खड़ी की; कि, उल्लिखित इमारत बड़े प्रतिष्ठित किरायेदार अर्थात् स्टैंडर्ड बैंकके कब्जे में है; और यह कि, मेरा मुअक्किल उस भूमिपर ईंट और पत्थरकी इमारतें भी खड़ी कर रहा है। इन परिस्थितियोंमें मैं निवेदन करता हूँ कि स्वत्वाधिकारकी रजिस्ट्री करानेके बारेमें मेरे मुअक्किलके प्रार्थनापत्रपर पुनः विचार किया जाये। मुझे भरोसा है कि गवर्नर महोदय कृपापूर्वक इसे मंजूर करेंगे । [ अंग्रेजीसे ] पीटर मैरित्सबर्ग आर्काइव्ज, सी० एस० ओ० ८६५८/१९०० आपका आज्ञाकारी सेवक, मो० क० गांधी Gandhi Heritage Portal