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पृष्ठ:सम्पूर्ण गाँधी वांग्मय Sampurna Gandhi, vol. 3.pdf/३५२

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३१२ सम्पूर्ण गांधी वाङमय उत्तरदायी हैं। कोई समुदाय हो, इस दिशामें उसकी पूर्ण उपेक्षा की गई तो उसका कुछ हिस्सा आपत्तिजनक अवस्थामें पहुँच ही जायेगा । इस समय सबसे बड़ी बात, जिसके लिए श्री गांधी आग्रह कर रहे हैं और जिसपर अपना ध्यान लगाये हुए हैं, उस कानूनको रद कराना है जिसको वे "वर्गगत कानून" कहते हैं और जो पर्यवेक्षकके कार्यालय और नगर परिषद (टाउन कौन्सिल) द्वारा लागू किये गये नियन्त्रणोंमें परिलक्षित है। उनके विचारसे दक्षिण आफ्रिकामें एशियाइयोंके बहुत बड़ी संख्या में आनेकी कतई गुंजाइश नहीं है । प्रवासी प्रतिबन्धक अधिनियम (इमिग्रेशन रिस्ट्रिक्शन्स ऐक्ट) के द्वारा देशान्तरवास नियन्त्रित है। यह नेटालमें भारतीयोंके विरुद्ध उचित रीतिसे लागू किया गया है। इसी तरहका एक कानून केप उपनिवेशमें जारी हुआ है और डेलागोआ बेके अधिकारियोंने जो कानून चलाये हैं वे अपने प्रयोगमें और भी कड़े हैं। इन कानूनोंके अनुसार प्रवासीको तभी जहाजसे उतरने दिया जाता है, जब कि वह सिद्ध कर दे कि वह पहले इस देशमें स्थायी रूपसे रह चुका है, अथवा कोई-न-कोई यूरोपीय भाषा पढ़ने और लिखनेकी योग्यता रखता है। इस सम्बन्धके कानून अकेले भारतीयोंके विरुद्ध ही लागू नहीं हैं, और चूँकि कानूनकी पुस्तकमें ऐसे एक विधानका दर्ज होना अवश्यम्भावी है, श्री गांधीको इस स्थितिको स्वीकार कर लेनेके लिए विवश होना पड़ा है और उनका सुझाव है कि स्थानीय कानून थोड़े परिवर्तनके साथ नेटालके कानूनके ढंगपर हों। वे उन कानूनों को हटानेपर जोर देंगे जिनमें भारतीयोंके लिए पृथक् बस्तियोंकी व्यवस्था है। इसके पक्षमें वे यह तर्क पेश करते हैं कि भारतीयोंके ज्यादा गरीब तबके स्वयं अपनी इच्छासे किसी भी स्थानमें रहेंगे, जो उनके लिए निर्दिष्ट कर दिया जायेगा; और केवल थोड़े-से अधिक धनी और समृद्ध व्यापारी शहरमें रहेंगे । चूंकि ट्रान्सवाल एक शाही उपनिवेश है, वे भारतीयोंको व्यापार करनेके परवाने जारी किये जानेके नियन्त्रणोंको हटानेकी वांछनीयतापर जोर दे रहे हैं। नेटाल और केप उपनिवेश स्वशासित हैं और अपने आन्तरिक मामलोंके सम्बन्धमें अपने खुदके कानून बना सकते हैं । परन्तु उनकी दलील है कि साम्राज्य सरकारको ट्रान्सवालमें सम्राट्के प्रजाजनोंको व्यापार और कार्यकी स्वतन्त्रता देनेकी अपनी सामान्य नीति अवश्य ही लागू करनी चाहिए। [ अंग्रेजीसे ] टाइम्स ऑफ़ इंडिया, ६-४-१९०३ २२५. दक्षिण आफ्रिकाके ब्रिटिश भारतीय' जोहानिसबर्गे अप्रैल १२, १९०३ इस समय ट्रान्सवालमें ब्रिटिश भारतीयोंकी स्थिति निम्न प्रकार है : स्टैंडर्टन में पैदल पटरियोंकी शिकायत अस्थायी रूपसे दूर हो गई है; सरकारने सेना- धिकारीको हिदायत कर दी है कि वह भद्र वेश और भद्राचरणवाले एशियाइयोंके विरुद्ध उप- नियमका प्रयोग न करे । साथमें नत्थी सरकारी सूचनासे परवानों की स्थितिका पता चलता है। इसके कारण लोगों में भय फैल गया है, क्योंकि : १. यह “ एक संवाददाता द्वारा प्रेषित " रूपमें इंडिया में प्रकाशित हुआ था । Gandhi Heritage Portal