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पृष्ठ:सम्पूर्ण गाँधी वांग्मय Sampurna Gandhi, vol. 3.pdf/४१२

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३७० सम्पूर्ण गांधी वाङमय "ट्रान्सवालकी सरकारने निहित स्वार्थीको कभी नहीं छुआ; क्योंकि गण- राज्यके समय ब्रिटिश राज-प्रतिनिधियोंका शक्तिशाली संरक्षण सदा प्राप्त था । " 46 कुछ वर्तमान 'परवानादारों' को, जिनके पास हजारों पौंडकी कीमतका माल पड़ा है, आज्ञा मिली है कि वे वर्ष के अंततक पृथक् बस्तियों में चले जायें, यद्यपि परवाने उनको ब्रिटिश अधिकारियोंसे मिले थे। " आजकल ट्रान्सवाल में ब्रिटिश भारतीयोंपर क्या गुजर रही है, उसका यह नमूना मात्र है। ब्रिटिशोंके हाथमें सत्ता आनेके दो वर्ष बाद भी भारतीय यह नहीं जान पाये हैं कि आज उस झंडे के नीचे उनकी वास्तविक स्थिति क्या है, जिसके संरक्षणका भरोसा करना उन्हें बचपन से ही सिखाया गया था। श्री चेम्बरलेनने जब उपर्युक्त बात कही तब उनके मनमें क्या चल रहा था, हम नहीं जानते । ऊपर जो आरोप प्रस्तुत किये गये हैं, उनका अगर श्री मंचरजी निश्चित उत्तर प्राप्त कर सकें तो कोमकी बहुत बड़ी सेवा होगी । [ अंग्रेजीसे ] इंडियन ओपिनियन, १८-६-१९०३ २५९. प्रवासी विधेयक स्थानीय संसदको नीचे दिया हुआ प्रार्थनापत्र भेजा गया है : [ सेवामें ] डर्बन जून २३, १९०३ माननीय अध्यक्ष और सदस्यगण विधानसभा, नेटाल संसदस्थ पीटरमैरित्सबर्ग नेटाल उपनिवेशवासी भारतीयोंके प्रतिनिधि निम्न हस्ताक्षरकर्ताओंका प्रार्थनापत्र नम्र निवेदन है कि, प्रवासियोंपर अधिक नियन्त्रण लगानेवाला विधेयक इस समय इस माननीय सदनके विचाराधीन है। आपके प्रार्थी इसी सम्बन्ध में आदरपूर्वक इस माननीय सदनकी सेवामें उपस्थित हो रहे हैं । प्रार्थी विधेयक के सिद्धान्तको स्वीकार करते हैं । परन्तु उनका निवेदन है कि इस विधेयक के द्वारा जो और अधिक नियन्त्रण लगाये जा रहे हैं, वे अनावश्यक हैं। नियन्त्रण ये हैं : खण्ड ५ के उपखण्ड 'क' द्वारा शैक्षणिक कसौटीके मानदण्डका बढ़ा दिया जाना । खण्ड ४ के उपखण्ड 'च' द्वारा बालिगीकी उम्रका १६ वर्ष निश्चित किया जाना । आगन्तुक परवाने (पास) के अजंदारके लिए यह जरूरी होना कि वह प्रवासी प्रतिबन्धक अधिकारी या खण्ड २३ के अधीन नियुक्त अन्य अधिकारियोंके सामने हाजिर हो । Gandhi Heritage Portal